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एक वो, और एक ये! लेकिन ये! ये विशेष है! ये एक साध्वी है! बाद में ब्रह्म-साध्वी बन जायेगी! किसी ऊंचे औघड़ के समान! आदर, सम्मान! झुक जाये...
मुस्कुरा पड़ी! “अरे काजल? कम बोलती हो क्या?” मैंने पूछा मुस्कुरायी, और बर्तन उठा लिया, और चल पड़ी बाहर! “ये तुम्हारी बहन काजल बहुत अच्छी लड़की ...
उसने ली, और खाना शुरू किया, “पूजा? चाय नहीं पियोगी?” मैंने पूछा, “मैं पी चुकी हूँ” वो बोली, “अच्छा!” मैंने कहा, मजे बाँध दिए! दोनों लड़कियो...
“ज़रूर!” मैंने कहा, और तो ठुमकते हुए चली गयी! और हम बैठ गए! थोड़ी ही देर में, पूजा आ गयी! पूरा लोटा और गिलास लेकर! साथ में काजल भी! खाने क...
बेचारी से उठा भी नहीं! हाँ, कोशिश की! “आज रुक जाओ, अगर मौसम ठीक नहीं हुआ तो हम भी चलेंगे!” वो बोली, चलो जी! ऐसा ही सही! मैंने सामान उठाया, ...
जिन्होंने बुलाया था हमको यहाँ, उनसे बातें कीं, और फिर सामान उठाया अपना अब! विदा ली, और निकल गए! तभी आवाज़ आयी पीछे से, मैं रुका, ये काजल ...
अब तो जैसे, वे विश्राम कर रहे थे! आज निकलना ही बेहतर था! क्रिया अब सम्भव नहीं थी! शर्मा जी भी उठ गए! और फिर मैं स्नान करने चला गया, वापिस आय...
“ऒह..अच्छा” मैंने कहा, फिर से एक और गिलास! और सभी ने पिया! सामान इतना था, कि पेट भर गया! आज तो हो गया भोजन! पूजा भी अब नशे में थी! सो भे...
“अरे वाह! सारा ही उठा लायीं क्या?” मैंने पूछा, “अभी बहुत है वहाँ, आप खाइये!” वो बोली, बैठ गयी! और मैंने गिलास बना दिए! तभी बारिश ने जैसे हमारा...
डर लगता है गर्जन से?” मैंने पूछा, “नहीं तो, बस कान दुखते हैं” वो बोली, “अच्छा! अच्छा!” मैंने कहा, और फिर से गिलासबाजी! “काजल को भी ले आतीं?” म...
सच में! अवाक! अवाक रह गया मैं! बाइस साल की उस लड़की ने अवाक कर दिया! सच में! क्या नहीं मिलता! मैं उसको कच्ची बुद्धि से अवाक था! कच्ची बुद...
उस से कहीं ज्य़ादा! “काजल छोटी है तुमसे?” मैंने पूछा, “हाँ, एक साल” वो बोली, “अच्छा!” मैंने कहा, और उसका गिलास और भर दिया, और फिर दूसरी बोतल ...
वो उसको भी गटक गयी! “काजल कहाँ है?” मैंने पूछा, “कमरे में अपने” वो बोली, और तभी फिर से बिजली कड़की! चकाचौंध हो गया कमरा! डर सी गयी वो! कानो...
“सुनो पूजा, दारु पीती हो?” मैंने पूछा, “हाँ” वो बोली, “पियोगी?” मैंने पूछा, “पी लूंगी!” वो बोली, शर्मा जी ने गिलास भर दिया एक! और दे दिया उस...
झमाझम! और बिजली कड़की! सारा स्थान चमक में नहा गया उसकी! हम मढ़े रहे! अब क्या करते! वर्षा ने तो सोच ही रखा था कि, नहीं जमने देगी औघड़ों की महफ़...
