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अपने लक्ष्य के लिए तो हम, अपने पिता से, माता से, भाई से, बहन से, भार्या से, मित्र से, सभी से विवाद कर लें! और नहीं तो भला-बुरा भी कह द...
एक नन्हा सा बीज, अपनी सुकोमल देह के संग, भूमि को फाड़ कर अंकुरित हो जाता है, वैसे ही ये सत्य है! सत्य को आप किसी भी वस्तु या मिथ्या-लौह से ढक द...
तो क्षमा चाहता हूँ! क्षमा करें! हाँ! वेताल प्रसन्न था! वो पेड़! ऐसे हिलता था, जैसे, बातें सुन रहा हो हमारी! वो सेमल का पेड़ अब तो! सिं...
इलाज करवाओ! और ये! ये सम्भव नहीं! क्यों? क्योंकि, यात्रा पर जाना है! डुबकी लगानी है! छात्र चढ़ाना है! वस्त्र चढाने हैं! श्रृंगार देना...
कमाने को! श्रम करने को! बुद्धि दी है, विवेक दिया है! किसलिए? क्योंकि हम कर्म-योनि में हैं! तो भूखा कौन? भूखे वो! जो इस कर्म-योनि में न...
मूढ़ लोग! हाँ मूढ़ लोग! जाया करते हैं, और फिर प्राकृतिक आपदा के शिकार हो जाया करते हैं! तब कहाँ होता है ये?? ये मतलब वो! वो! वही, वही रच...
विभिन्न प्रकार के जीव-जंतु अपना जीवन यापन करते हैं! ये प्राण-दायक है उनके लिए! इसलिए ये अमृत है इस धरा पर! अब आसव! आसव से प्यास नहीं बुझती! मद चढ़ता है...
परन्तु, गुण में सर्वथा भिन्न! क्या प्रश्न किया था वेताल ने! प्रश्न और तीक्ष्ण से हो चले थे! बाबा ने प्रश्न दोहराया! कुछ सोचा! अपनी अनुभव क...
मैं भी प्रसन्न था! वेताल प्रसन्न था! तभी बना हुआ था! नहीं तो अब तक वो चला गया होता! और हम भूमि पर गिरे होते! वो पेड़ के भवरें काट रहा था!...
सोचा! विचारा! अपने व्यक्तिगत अनुभव टटोले! खोला पिटारा! और उत्तर दिया– हे कौशान! हे वेताल! सत्य कहा आपने! सबसे बड़ा दुर्गुण ये अमर्ष ही है! इस स...
सही और सटीक उत्तर था उनका! सच में! ये त्रिदिव, नगेश है इस रत्नगर्भा में! कोई संदेह नहीं! अकाट्य सत्य! और फिर से कूदा नीचे वेताल! सर को झ...
और उत्तर दिया– हे कौशान वेताल! त्रिदिव! यूँ तो ये त्रिदिव इस रत्नगर्भा में इसके प्रत्येक सैकत में है! पर आपके प्रश्न के आशय में मैं यही कहूंगा कि ये त...
वेताल कूदा! और बाबा के सम्मुख हुआ! बाबा का एक चक्कर लगाया, बाबा उसके केश-पाश में बंध गए जैसे! फिर से सम्मुख हुआ! और फिर से एक और प्रश्न! प...
त्वरित उत्तर भी दिया करते थे! वेताल वहीं था, अभी बना हुआ! प्रसन्न था वो! इसी कारण से कि, उसके प्रश्नों के उत्तर मिल रहे थे उसको! मित्रगण! ...
बहुत कठिन हैं! अर्थ का अनर्थ हो जाए, यदि कोई शब्द समझ नहीं आये तो! और कहीं वेताल क्रोधित हुआ, तो समझो लटके प्राण अधर में! इसीलिए, वेताल-सा...
