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सब ख़तम! वेताल चला गया था! हम सफल रहे थे! मैं भागा! और बाबा के चरणों में लेट गया! पकड़ लिए चरण! बाबा झुके, और मुझे उठाया! और गले से लगा ...
उछल-कूद करे! पाँव पटके! अट्ठहास करे, तो उसका उदर हिले! और हिलें हम भी! तभी अट्ठहास हुआ! और वो बाबा के समक्ष हुआ! अपने शरीर में! करीब प...
कारण है, कि इस निलय के बहकावे में आकर हम अपनी ज्योति को मद्धम कर लिया करते हैं! उसमे कलुषिता का आवरण चढ़ा दिया करते हैं! दुष्कर्म कर इस पावन निलय को दू...
ये था आशय उस वेताल का! कि महत्वपूर्ण है कि नहीं! है तो कैसे! नहीं तो क्यों! राय मांगी थी उसने! और अब सब, इसी राय पर निर्भर था! कि आरूढ़-क...
वैसे ही, शाख पर जा लटका! उसके केश भूमि पर ही थे! फिर वो कूदा! और बाबा के सम्मुख हुआ! “साधक! एक अंतिम प्रश्न!” वो बोला, “हाँ हे कौशान वेताल...
वार्तालाप भी हुआ है अतृप्त का! आप पूछ सकते हैं अतृप्त से! हां, वो कौशान वेताल, हँसे जा रहा था! झूमे जा रहा था! प्रसन्नता के मारे, अजीब अ...
और फिर से अट्ठहास! कौशान हंस रहा था! प्रसन्न था! जैसे कोई बालक प्रसन्न होता है, ऐसा व्यवहार कर रहा था! शायद उसे स्व्यं नहीं पता था, कि...
फिर से दोहरा दिया! अब बाबा आगे बढ़े! और बोले! उत्तर– हे कौशान! हे वेताल मुझे विलम्ब हुआ! क्षमा चाहूंगा! इस धरा पर सबसे बड़ा कालकूट है दम्भ! ये सब ...
मुझे पूर्ण आशा थी कि इसका भी उत्तर, वे सटीक रूप से देंगे! वेताल ने अट्ठहास लगाया! और बाबा ने प्रश्न दोहराया! फिर विचार किया! और फिर से प्रश्...
बाबा के सम्मुख! और गरदन नीचे की उसने! पास, और पास, जैसे गंध ली हो बाबा की, और फिर झटके के साथ, खड़ा हो गया वो! और फिर से प्रश्न किया! प...
उत्तर- हे कौशान! हे वेताल! हम अल्पबुद्धि जीव हैं! जो कुछ सीखते हैं यहीं सीखते हैं! यहीं, इस संसार में हम अंश अंश इकठ्ठा कर अपना ज्ञान बढ़ाते हैं! अब आप...
प्रमान अर्थात प्रकाश, अर्थात दिन का प्रकाश अथव दिन! स्मरण रहे, तमिस्र है ये, यामिनी नहीं! रात्रि नहीं! केवल अन्धकार! और प्रमान! कोई कै...
और पाँव नीचे! अट्ठहास करता! हिला देता था हम सबको! असान-मसान सब भाग चुके थे! नहीं तो आज अंत हो जाता उनकी इस योनि का! शमशान हिला रखा था उसने! ...
ना बाप! ना ही तेरे भाई-बहन! ना कोई मित्र, और ना ही तेरी भार्या! जो मर्जी कर! छोटी सी बात है! जैसे कर्म, वैसे फल! बस! यही है मूल सत्य...
तो ये देह किसकी हुई? कौन है इस देह का असली मालिक? वो? नहीं! कदापि नहीं! उसने तो दे दिया तेरे मांस के पिंड में जीवन! वो ज्योति! दे दी उसन...
