श्रीशः उपदंडक
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@1008
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RE: वर्ष २०१४, भैलवा के सरभंग!

चलिए! एक और मस्तिष्क-पहेली बूझ रहा हूं! सभी को पता है कि सबसे पहले सृष्टि में, इस प्रकृति का ही जन्म हुआ और उसके बाद, शेष रचनाएं हुईं! इन्हीं रचनाओं म...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, भैलवा के सरभंग!

"खबर मिली थी, तू जा रहा है?'' पूछा मैंने,"जाना था, नहीं जा पाया!" बोला वो,"और वो ठीक है तेरी, क्या नाम है उसका?" पूछा मैंने,"रेश्मी?" बोला वो,"हां! वो...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, भैलवा के सरभंग!

गजनाथ भी हड़बड़ा कर उठ गया था! वो जो बुलाने आया था वो चला भी गया था, शायद ऐसे ही सभी को जगाने के लिए निकला था!"आ गए शायद!" कहा मैंने,"हां, हो सकता है!" ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, भैलवा के सरभंग!

अब कुछ रीत! ये सब मैं गीता के अनुसार ही बताऊंगा! प्रयास करूंगा मेरा अर्थ है! सबसे बड़ा प्रश्न और जंजाल! इस प्रश्न से मैं सदैव ही जूझता रहता था, परन्तु,...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, भैलवा के सरभंग!

अब तनिक यथार्थ का चिंतन-मनन! भगवद गीता, एक पवित्र हिन्दू ग्रंथ है! सबसे पहले तो ये शब्द, हिन्दू! इसका मूल क्या है? दरअसल हिन्दू शब्द का कोई मायने ही न...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, भैलवा के सरभंग!

नमस्कार मित्रगण! तो आज फिर से कुछ नया ही प्रस्तुत करूंगा! सबसे पहले गुज़ारिश है कि ऐसा नहीं मान लें कि जो मैंने कहा या लिखा वो अंतिम है, कुछ कम भी सम्भ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, भैलवा के सरभंग!

थोड़ा सा और लिखना चाहूंगा! सात्विक, राजसिक एवं तामसिक! ये हैं क्या? कभी विचार किया है? या फिर सात्विक का अर्थ हुआ, मांस-मदिरा से दूर! राजसिक हुआ राजा क...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, भैलवा के सरभंग!

कुछ देर बाद आया वो, और बैठ गया, इस बार कुक्कड़ ले आया था, वही रख दिया सामने उसने! और बैठ गया!"अभी कोई पता नहीं!" बोलै वो,"कोई नहीं आया?" पूछा मैंने,"नह...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, भैलवा के सरभंग!

चलिए मित्रगण! अब घटना का वर्णन! मैं समय समय पर इस प्रकार के विषय उठाता रहूंगा! एक बात और मित्रगण! मैंने देखा है, इंटरनेट पर, पत्रिकाओं में, किताबों मे...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, भैलवा के सरभंग!

लकीर के फ़कीर! सच ही तो कहा मैंने! मुझे कोई खेद नहीं ऐसा लिखने में! जो धर्म आज आप, हम सब देखते हैं, सुन रहे हैं, बांच रहे हैं, ये सब सत्ताओं का खेल है!...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, भैलवा के सरभंग!

मित्रगण! कल के इस राधा प्रकरण से अवश्य ही मेरे सात्विक मित्रों को असहजता महसूस हुई होगी! मानता हूं, क्षमा भी मांग ली थी पहले ही! आप और अधिक जानिये, जो...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, भैलवा के सरभंग!

हुआ यूं कि दो वर्ष पहले, एक व्यक्ति की मृत्यु अस्पताल में हो गयी, समय था सुबह चार बजे के आसपास का, वो व्यक्ति मसान के स्थान पर लाया गया, मसान ने उस से...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, भैलवा के सरभंग!

चलिए! आपको एक जगह लेकर चलता हूं! ये जगह है, मसान-स्थान! स्थल है मरघट, विशेषता, ये ब्रह्म-श्मशान है! इस ब्रह्म-श्मशान में, आठ प्रहर नहीं होते, चार होते...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, भैलवा के सरभंग!

नहीं! कोई नहीं! उनकी अपनी तो कदापि नहीं! यदि मैं ही गलत होऊं तो अवश्य ही बताएं! मित्रगण! कहते हैं, तंत्र में, बस वही ही बता सकता हूं, जो मनुष्य विवेक ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४, भैलवा के सरभंग!

मित्रगण! सत्य, सत्य सदैव कड़वा ही रहता है! सत्य का सामना प्रत्येक व्यक्ति नहीं कर सकता! और जो कर भी सकता है, वो शीघ्रता से उस पर विश्वास नहीं करता! एक ...

2 years ago
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