श्रीशः उपदंडक
श्रीशः उपदंडक
@1008
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RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

"तब तैयारी की जाए?" बोली दिशि,"बिलकुल!" कहा मैंने,"सब तैयारी है!" बोले आचार्य जी,"तो देर कैसी?" पूछा मैंने,"कुछ रसद ले लें!" बोले वो,"मतलब रात भी लगेग...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

तो मित्रगण! ठीक आठ बज कर पचास मिनट पर, एक सहायक आया और उसने प्रणाम कर, एक खबर दी कि मुझे बुलवाया गया है! मैं तो तैयार ही था! झट से अपना सूखा हुआ रुमाल...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

"इसका मतलब पूरा अमला ही आया है साथ!" कहा मैंने,"हां, इस बात तैयारी से आये हैं!" बोला वो,"ये भी अच्छा हुआ!" कहा मैंने,"हां, सो तो है!" बोला वो,"इस बार ...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

"क्या हुआ?" पूछा मैंने,"सच कहता हूं, मैंने ऐसा इंसान नहीं देखा जिसको इतनी सूक्ष्म जानकारी भी उंगली पर ही ज्ञात हो!" बोला वो,"श्रम लगता है!" कहा मैंने,...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

और बातें करते करते हम आखिर वहां पहुंच गए! थकावट के मारे अब तो घुटने भी गोल गोल घूमने लगे थे, गया मैं सीधा बालचंद्र के कमरे में ही, दो गिलास पानी पिया ...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

"हां!" बोली वो,"तो अब मैं समझा!" कहा मैंने,"क्या?" बोली वो,"कि जब तक आचार्य जी नहीं पहुंच जाते, तब तक कुछ भी आंकलन करना गलत ही होगा!" कहा मैंने,"मेरा ...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

उसने मेरा हाथ थाम लिया और मैं अब उसे, आगे ले चला! कमाल की बात, मंद सी बयार के हल्के से झोंके ने एक शिला को हिला दिया था! मुझे उस समय दिशि बेहद ही सीधी...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

"तो ये हड़ुक लोग यहां बसते थे!" कहा मैंने,"उनका आवास नहीं पता!" बोली वो,"लिपि में?'' बोला मैं,"हो शायद?" बोली वो,"तब तो कमाल ही हो जाएगा!" कहा मैंने,"ह...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

बायीं तरफ देखा तो उसने मुझे रुकने पर मज़बूर कर दिया! इस बीहड़ में अब मुझे लगा था कि यहां कभी कोई बस रहा होगा! उस बड़े से पत्थर ने मुझे अपनी ओर खींचा था, ...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

"सुनो?" बोली वो,"हां?" कहा मैंने,"सुनो?" बोली वो, इस बार जैसे बदन ढीला पड़ा हो उसका!"बोलो!" कहा मैंने,"आपके संग रहना ठीक नहीं!" बोली वो,"क्यों?" चौंक क...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

"हां? अब बताओ?" बोली वो,"इतना क्यों बेचैन हो गयी हो?'' पूछा मैंने,"बेचैन?" बोली वो,"हां, लगता है!" कहा मैंने,"हां, हूं!" बोली वो,"क्यों?" पूछा मैंने,"...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

तो जी हमारा ये 'टाइम-पास' वार्तालाप आगे बढ़ता रहा! मैं दरअसल दिशि का विश्वास जीतना चाहता था, स्त्री के जब तब अंतरंग में नहीं बहने लगोगे, आप सदैव पराये ...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

तो हम वहां से चल दिए, बैग कुछ भारी सा था, मुझे लग रहा था कि उस पर कुछ ज़ोर पड़ रहा है!"ये मुझे दो!" कहा मैंने,"अरे कोई नहीं!" बोली वो,"नहीं!" कहा मैंने,...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

"नहीं! ये आशय नहीं था मेरा!" कहा मैंने,"जो देखा, सो कह दिया!" बोली वो,"मेरा ये भी आशय नहीं था!" कहा मैंने,"अच्छा?" बोली वो,"हां!" कहा मैंने,"चलो, एक ब...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

"वो, सामने, क्या दीखता है?'' पूछा उसने,"वहां?" पूछा मैंने,"हां?" बोली वो,"कुछ नहीं!" कहा मैंने,"कुछ भी नहीं?" बोली वो,"सिर्फ उजाड़ ही!" कहा मैंने,"उजाड़...

2 years ago
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