श्रीशः उपदंडक
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@1008
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RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

तब लगातार, बदहवास से हम उन्हें ढूंढते रहे, चेहरों पर हवाइयां उड़ने लगीं, क्या जवाब देंगे, क्या उत्तर दे पाएंगे, शक हम पर ही जाएगा, वहां, उधर तो लोग जान...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

रात के तीन बज रहे थे, सन्नाटा पसरा हुआ था, सन्नाटे की एक बोली हुआ करती है, लगता है कि मंद मंद से स्वर में कुछ गुनगुना रहा हो! उसे भय नहीं होता, भय के ...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

कनकभद्रा, तांत्रिक शक्ति है, अक्सर इसका डोरा खींचा जाता है ताकि आसपास बिखरा हुआ, ज़मीन में दफन धन, एक जगह इकट्ठा हो जाए और तब भूमि का कोई हिस्सा ऊपर उठ...

2 years ago
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