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कितनी खुश थी वो!किसी को ख़ुशी देने में कितनी ख़ुशी होती है!कोई मोल नहीं इसका! कोई हँसे, खुश हो, तो आप धन्य हुए!उसके मन-मस्तिष्क में बस जाओगे आप!"क्या कर...
"दो लड़कियां हैं, ब्याह दी हैं!" कहा मैंने,"अच्छा!" बोली वो,"तुम्हारा ब्याह करवा दें?" कहा मैंने,"नहीं!" बोली तुनक कर!"क्यों?" पूछा मैंने,"नहीं!" बोली ...
"मैंने मना किया, लेकिन नही मानीं!" बोली वो,"मानती भी नहीं!" कहा मैंने,उसकी नाक देखी! बेहद सुंदर! पूरा मुखड़ा ऐसा सुंदर कि,सुकून दे अंदर तक!"जाओ! दर्पण ...
"सुंदर लग रही हो!" कहा मैंने,"अच्छा जी!" बोली वो!मैं बैठ गया वहाँ, बिस्तर पर,दुपट्टा सही कर रही थी, मैंने मदद की,तभी मैंने उसका वो श्वेत-माल देखा,और त...
कक्ष खोला, उसका सामान रखा,और बैठ गए हम!"आराम करो अब!" कहा मैंने,"गाड़ी में आराम कर लिया था न?" बोली वो,"तुम्हें नींद नहीं आती?" पूछा मैंने,"आती तो है?"...
मुझे दस बजे से, सुबह के पांच बज गए थे!उसका मस्तिष्क प्रखर है! उच्चारण स्पष्ट है!अगला दिन हमने विश्राम में बिताया, टिकट बनवा लिया थे,कैला जोगन से बात ह...
"बहुत नखरैल हो भई तुम तो!" कहा मैंने,"सुनो, मैं संकट झेल लूंगी, आपको आंच नहीं आने दूँगी, शपथ लेती हूँ!" बोली वो,मैं तो देखता रह गया उसे!ऐसा तो एक प्रब...
"नहीं" बोली वो,आंसू पोंछे अपने, और मेरे कपड़े गीले करे आंसुओं से!"अच्छा सुनो तो सही?" पूछा मैंने,बड़ी मुश्किल से देखा मुझे उसने, एहसान के साथ!"कभी बैठी ...
"पगली!" बोला मैं,सर पर हाथ फिराया उसके!"तुम साध्वी नहीं बनोगी!" कहा मैंने,"फिर?" बोली वो,"वहाँ है मेरी साध्वी!" कहा मैंने,"लेकिन चारु जैसी नहीं" बोली ...
कोई बात नहीं!मेरा भी है!और मैं वहां, आज तक,कभी नहीं हारा था!अब नियम बताये गए!कोई छल न हो,साध्वी-साधन न हो, आदि आदि!लेकिन!तावक नाथ जैसे लोग, कहाँ मानते...
"आइये फिर" बोले वो,और तब, मैं और शर्मा जी, चले उनके साथ,पहुंचे वहां!सभी थे, हम भी बैठे!"सुनो, तावक नाथ ने द्वन्द की चुनौती दी है, आपको स्वीकार है?" बो...
रो रो के बुरा हाल था उसका तो!मैं गया उसके पास, आंसू बहा रही थी मोटे मोटे!"क्या बात है?" पूछा मैंने,"कुछ नहीं" बोली धीरे से!"अरे कुछ नहीं होगा!" कहा मै...
"आपस के मतभेद हटाओ, भूल जाओ!" बोले वो,"मुझे स्वीकार है" कहा मैंने,"हाँ तावक?" बोले वो,"मुझे नहीं!" बोला वो,मैं हंस पड़ा!जानता था कि यही होगा!"फिर?" पूछ...
रस्सी की ऐंठन खुली!गुब्बारे की फूंक सी निकली!थूक गटका!"हाँ, सुना है!" बोला वो,"उनके ही शिष्य हैं!" बोले बाबा लाल,अब आँखें, जो चौड़ी थीं, सामान्य हुईं!"...
और तब वो समझी! रो रो के आँखें लाल कर लीं!कौन कहता है, कि मैं और आप, मैं वो चारु, या चारु और आप, या कोई अन्य, पराया होता है? कौन है पराया? कोई नहीं! बस...
