Last seen: Jul 22, 2026
वो चली आयी मेरे पास, पुनः, आसन पर बैठ गयी! मैनेअलख उठा दी और एक अलखनाद किया! अलख में ईंधन झोंका! अलख ने पायी जैसे जवानी अपनी!"साधिके?" कहा मैंने,"जी?"...
अलख में ईंधन झोंका जाने लगा! वहां भी और यहां भी! अलख तो जैसे भड़ाके छोड़े जा ही थीं महाताप के! आज अलख भिड़ने चली थीं! अलख ही तो प्राण हुआ करती है एक औघड़ ...
मैं उस स्थान पर जा पहुंचा! आसपास से, तीव्र गन्ध उठ रही थी गैंदे के फूलों की! बेहद ही प्यारी और पावन थी वो गन्ध! गैंदे के फूल खिले हुए थे, तामसी-गैंदा ...
अब सामान्य हो चली थी आस्था! जैसे कुछ हुआ ही नहीं था! ये सच है, जब भी कोई सामान्य व्यक्ति, इन ऊर्जावान अशरीरियों के सम्पर्क में आता है, तो उनके अंगों क...
मेरे पास से गुजरता हुआ वो साधक, जिसकी उम्र करीब पचपन होगी मुझे देख मुस्कुराया! मैं भी मुस्कुराया! वो आगे आया और मेरा कमरबन्द, कस दिया उसने! मैंने उसके...
आ गया अपने कक्ष में, आकर, कपड़े बदल लिए! पानी पिया और लेट गया! उस समय करीब, साढ़े पांच का वक़्त रहा होगा! अभी बस कोई बीस मिनट ही सोया होऊंगा कि दरवाज़े पर...
वाचाल का अट्ठहास गूंजता रहा! और झक्क की एक तेज आवाज़ करते हुए, वाचाल, वो राजसिक महाप्रेत प्रकट हुआ! भीग तैयार था! भोग स्वीकार हुआ और उसके बाद, वाचाल मह...
चार बजे तक का वक़्त, इसी होलझोल में निकल गया! मैंने कोमल को क्यों रोका था? इसकी एक वजह थी! ये वजह, मुझे भविष्य में कुछ लाभ दे सकती थी! और वैसे भी, कोमल...
अब अपनी साधिका का हाथ पकड़, आया उस स्थान पर, जो अब मेरी, प्रातःकाल तक, इस द्वन्द के अंत तक, कर्मभूमि होनी थी! महायोगिनी को नमन किया, चौंसठ योगिनिंयों क...
"क्या हुआ?" पूछा उसने,"तब तो मालकिन हुईं तुम तो!" कहा मैंने,"रहने दो!" बोली वो,"क्यों?" पूछा मैंने,"ऐसे ही, जाने दो!" बोली वो,"चलो कोमल, मिलूंगा बाद म...
अब ये समस्या अपने आप में, बहुत बड़ी थी! अब क्या किया जाए? काया प्रबंध हो जाएगा? न हुआ तो? न हुआ तो, बांधव-क्रिया करनी होगी, परन्तु, उसके लिए समय नहीं! ...
"तो कुछ भी नहीं क्या?" बोली वो,"सुनो, मुझे नहीं पता, मुझसे बात करना दो दिन के बाद, ठीक?'' कहा मैंने,"हाँ, चलो, कोई बात नहीं" बोली वो,"इस जेवरनाथ से भी...
मैं चला गया स्नान करने! स्नान किया और वस्त्र पहन, आ गया वापिस बलदेव के पास, बलदेव और बिसन वहीँ बैठे थे,"आइये, बैठिये!" बोला बलदेव!"क्या रहा?" पूछा मैं...
"आप बैठिये, मैं आया!" बोला मैं,"कौन नन्दा?" बोले वो,"है यहां कि एक औरत!" कहा मैंने,"उसी सिलसिले में?" बोले वो,"हाँ, शायद!" कहा मैंने,"आइये, यहीं बैठा ...
गाड़ी सरपट दौड़ पड़ी हमारी! मेरे मन में कोई भय नहीं था, मुझे अभी वहां पहुँच कर, श्री जी से बात करनी थी, आदेश लेना था, आज्ञा लेनी थी! फिर तो समक्ष कोई भी ...
