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“वो बलदेव? उसके पास आपका सामान है? है न?” मैंने पूछा, “हाँ” उसने कहा, “अब वो तुमको वापिस चाहिए?” मैंने कहा, “हाँ” वो बोला, “तो ये पंडित जी कौन...
“उसकी एक लड़की है, वो हमारे गाँव में ब्याही है, बलदेव से हमारी दोस्ती है, दोस्त है हमारा वो” उसने कहा, “कौन सा गाँव है?” मैंने पूछा, “बोहड़ा” उसने क...
अब दूसरा आगे आया, “पंडित रामसरन कहाँ रहते हैं?” उसने पूछा, “यहाँ कोई पंडित रामसरन नहीं” मैंने कहा, “है कैसे नहीं?” उसने गुस्से से कहा, “नहीं ह...
मैं फिर रुका, अब मैं उनसे कोई छह फीट दूर था, वहाँ झाड़-झंखाड़ थे, कुछ जंगली रमास के पेड़ थे, बर्रे उड़ रहे थे, शायद छत्ता था उनका वहाँ, “कौन हो तुम लो...
दुशाला सी ओढ़े! वे चार थे! वे भी हमे ही देख रहे थे! एक ने दुशाला उठायी, और अपनी तलवार निकाली! वे आक्रामक थे, सभी के सभी! एक बात और, उनकी ...
बाहर आये, और फिर मैंने आसपास देखा, सब जगह ऐसा ही नज़ारा था! किसी वक़्त का ज़िंदा शर अब मृत था! कुछ नहीं था वहाँ, बस झाड़-झंखाड़ और उन दीवारों से झांकते...
अब मैंने उनको अपने साथ वाले कमरे में सोने को कहा, वो कमरा जिसका था वो आज कहीं और सोता, “कोई भी दिखे, मुझे बताइये, घबराइये नहीं” मैंने कहा, “जी” वे...
“कैसे?” वे बोले, “वो पता चल जाएगा” मैंने कहा, “अच्छा!” वे बोले, “हाँ!” मैंने कहा, “बढ़िया!” वे बोले, “एक काम कीजिये?” मैंने कहा, “जी?” उन्ह...
“हाँ जी” वे बोले, “नज़र मारो, कहीं कोई दिख रहा है?” मैंने पूछा, उन्होंने चारों तरफ देखा, ऊपर खंडहर के, आगे, पीछे, “कोई नहीं है” वे बोले, ...
एकबार फिर से चाय पी, अब शाम का धुंधलका छाने लगा था, नितेश और अशोक वहीँ थे दोनों, अब सलाह हुई कि अब चला जाए वो स्थान देखने जहां वो हादसा पेश आया था, वे...
फिर चाय आ गयी, वो भी पी! साथ में कचौड़ियां भी खायीं! तीखी! मसालेदार! हम वहीँ बैठे थे! एक बैठक में! नितेश भी वहीँ थे! “कोई दिखा?” मैंने पूछा, ...
शाम को आये, तो बताया कि टिकट हो गए हैं, दो दिन बाद के, ये ठीक था, हम दो दिन बाद वहाँ के लिए निकल पड़े! हम अजमेर पहुंचे, अशोक जी लेने आये थे ह...
अब मैंने एक धागा पढ़ा, और उसको बाँध दिया उनके हाथ पर, अब कमसे कम कोई क्षति नहीं पहुँच सकती थी उनको, “कब दर्शन देंगे गुरु जी?” अशोक जी ने पूछा, “मैं...
“घर से बाहर शहर जाने के रास्ते में पड़ता है” वे बोले, “उन्होंने रोका नहीं?” मैंने पूछा, “मैं बस में था” वे बोले, “चारों थे?” मैंने पूछा, “हाँ ज...
ये भी तो झूठ नहीं बोल रहे! हो सकता है, ऐसा हो! बड़ा अजीब! “अच्छा, फिर?” मैंने पूछा, “मैं घर पहुंचा किसी तरह, घर पर भाइयों ने मेरा हाल देख...
