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“तुम चार ही थे या और भी थे?” मैंने पूछा, “और भी थे” वो बोला, “वो कहाँ हैं?” मैंने पूछा, “यहीं हैं” उसने कहा, “कहाँ?” मैंने पूछा, “यहीं हैं” ...
अब मैंने और कुरेदने की सोची! इस से मुझे उनको यक़ीन दिलाने में मदद मिलती, हो सकता है कि वो ऐसे ही मान जाएँ! “अच्छा एक बात बताओ?” मैंने पूछा, “पूछो?”...
मैं आगे बढ़ा, वे पीछे हुए, मैंने अपने कमरे के ऊपर देखा, छत पर दो आदमी खड़े थे! ये वही थे! मैं और आगे बढ़ा, वे फिर हटे, “डरो नहीं!” मैंने कहा, ...
उसकी हालत वाक़ई में बहुत खराब हो चली थी, उसको हर पल यही लगता था कि कोई उसको देख रहा है, कोई लगातार नज़र रखे हुए है, और मौक़ा पड़ते ही कोई उस पर हमला कर दे...
और फिर कुछ ही देर में हम चल पड़े शहर के लिए, वहाँ घूमे थोड़ा बहुत और कुछ नमकीन आदि खाया, फिर कुछ सामान खरीद लिया, ये रात के लिए महफ़िल सजाने में काम आना ...
“कैसे?” उन्होंने पूछा, “वे माल के लिए आये हैं, और उनको लगता है कि माल का पता ये नितेश बता सकता है, इसीलिए” मैंने कहा, ”अच्छा” वे बोले, “हाँ” मैं...
“ये तो है” मैंने कहा, “अब ये डाकू, क्या नाम बताया? राम लुभाया!, ये सरदार है इनका, अब ये माल ढूंढ रहे हैं!” वे बोले, “हाँ!” मैंने कहा, “इतिहास वर...
“नहीं” वो बोला, “जब गुरु जी हैं तो लगेगा भी नहीं” वे बोले, “हाँ” वे बोले, उसके बाद हम बैठे रहे, बातें करते रहे, फिर अशोक और नितेश चले गए, रह...
अशोक जी ने सारा हाल कह सुनाया! घर में भय का माहौल छा गया! शर्मा जी ने समझाया अब! अब मैंने नितेश से कह दिया, कि अब वो हमारे कमरे में ही सोये, वो ...
इस सब के बीच ख़राब चालीस मिनट लगे थे! वे लोग बस मुझे ही देख रहे थे और किसी को नहीं! अब मैं वापिस आया वहाँ से, उनके पास, नितेश ने सबकुछ देखा था, क्योंकि...
उसने गुस्से से देखा! “मेरी गरदन उड़ाएगा न तू?” मैंने पूछा, “यहीं धड़ से अलग कर दूंगा, सर साथ ले जाऊँगा!” वो बोला, “अच्छा!” मैंने कहा, इतने में द...
“कहाँ मारी डकैती?” मैंने दबी सी आवाज़ में पूछा, वे चुप! अवाक! गुस्से में! “बताओ तो?” मैंने पूछा, कोई न बोला! “डाका मारा था की नहीं?” मैंने ...
“वो बलदेव? उसके पास आपका सामान है? है न?” मैंने पूछा, “हाँ” उसने कहा, “अब वो तुमको वापिस चाहिए?” मैंने कहा, “हाँ” वो बोला, “तो ये पंडित जी कौन...
“उसकी एक लड़की है, वो हमारे गाँव में ब्याही है, बलदेव से हमारी दोस्ती है, दोस्त है हमारा वो” उसने कहा, “कौन सा गाँव है?” मैंने पूछा, “बोहड़ा” उसने क...
अब दूसरा आगे आया, “पंडित रामसरन कहाँ रहते हैं?” उसने पूछा, “यहाँ कोई पंडित रामसरन नहीं” मैंने कहा, “है कैसे नहीं?” उसने गुस्से से कहा, “नहीं ह...
