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रात के दो बज चुके थे! हम अंदर बैठे! और फिर अशोक जी को बता दिया कि ये सिलसिला अब ख़त्म हुआ! अब नितेश को कोई खतरा नहीं! कोई नहीं आएगा उसके पीछे अब! वे ...
अब मुझे कुछ निर्णय लेना था! शीघ्र ही! मैंने गौर किया, सबसे अहम् कड़ी ये राम लुभाया ही था, वही सबसे ज्यादा परेशान था, ये बेचारा सौ वर्षों से लगातार पंडि...
उसके पास माल नहीं था, वो तो पंडित जी को दिया था उसने, बलदेव को देने के लिए! आवाज़ फिर से लगायी गयी! सहम गया राम लुभाया! उसको बुलाया गया वहाँ ...
फिर सरदार बैठ गया! उसके साथी भी बैठ गये! “लो?” वो फिर से बोला, एक नयी बोतल! वैसी ही! गिलास भर चुके थे, मैंने थोड़े से चावल खाये! और फिर अ...
“अच्छा!” मैंने कहा, अब सरदार गरजा! उस आदमी को उठाया गया, वो चिल्ला भी नहीं सका! और उस आदमी को खींच कर ले गए वहाँ से! फैंसला हो गया था! मित...
अरे नहीं” उसने गर्दन हिला कर कहा, “तुम तो ले ही नहीं रहे?” मैंने पूछा, “सरदार के साथ लूँगा!” उसने कहा, ”अच्छा!” मैंने कहा, अब सरदार खड़ा हुआ! ...
मित्रगण! जब आप ऐसी किसी केहफ़ील में हों, और आपको पता ही न हो कि ये प्रेतों की महफ़िल है, आप नहीं पता लगा सकते! वे जीवित होते हैं, उनको छुओगे तो स्पष्ट र...
सभी वाह वाह कर उठे! मैंने वैसे सिक्के पहली बार देखे थे, शायद खुद ही ढाले गये थे! कम से कम बीस किलो तो होंगे ही! फिर उसके सामान को भर दिया गया वापिस ...
“लो?” उसने फिर से कहा, मेवे दिए मुझे, मैंने लिए, शर्मा जी ने भी लिए, फिर मैंने बचा हुआ गिलास भी खाली कर दिया! टक्कर लगी! डकार आयी! लेकिन...
अब मदिरा टक्कर मारने वाली थी, थोड़ी ही देर में! फिर से ताली बजी! मैंने वहीँ देखा, एक ने एक पोटली दी, उस तसले में रख दी गयी! खोला गया, टन्न ...
अथाह दौलत! सोना! चांदी! बर्तन! मूर्तियां! एक छोटा झूला! सोने की छड़ें! कहीं मोटा हाथ मारा था उन डाकुओं ने! सभी अवाक रह गए! सभी एक एक सामान देखने ...
कसरती जिस्म! कम से कम सात फीट का! घोड़े जैसी देह उसकी! “अच्छा!” मैंने कहा, दरअसल ताली बैसा ने ही बजायी थी! “तो ये बैसा आपका सरदार है?” मैंने ...
ताली बज उठीं! अब समझा! ये तो नुमाइश लगी थी! अपनी अपनी लूट की! फिर उस आदमी ने वो सारा सामान उसी गठरी में डाल दिया, बाँध दिया और जिसकी थी, उसको ...
“बैठो” वो बोला, हम बैठ गए! हाथ लगा के देखा तो ये एक टाट सा था! सूती टाट, दरी सा! तभी मेरे सामने दो गिलास रखे गये! उनमे कुछ तरल परोसा गया! गं...
दस-पंद्रह मिनट बीते, हम आगे बढ़े, और तभी मुझे सामने कोई खड़ा दिखायी दिया! हम वहीँ चल पड़े! वहाँ पहुंचे! ये राम लुभाया था! “आओ” उसने कहा, हम...
