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उसकी वो महा-शक्ति दौड़ी लक्ष्य-भेदन हेतु! मेरी त्रिशाका ने उसको रोका! वहाँ मानव-अवशिष्ट की वर्षा हो गयी! कटे हाथ, पाँव, मुंड, काले काले मस्तिष्क के लो...
उसके बाद कर्ण-पिशाचिनी का आह्वान किया! कच्ची कलेजी चबाते हुए उसका आह्वान किया जाता है! कर्ण-पिशाचिनी जागृत हुई! फिर उसके बाद त्राशाका-यक्षिणी का आह्...
"सुनो साध्वी, रात्रि ग्यारह बने मै क्रिया आरम्भ करूंगा, व्योम १२ बने करेगा, उसके साथ और भी औघड़ हैं, ये उनकी और मेरे बीच द्वन्द की भूमि ही नहीं मान-सम...
"हाँ, कभी नहीं देखा, उसने काफी को मटियामेट किया है, मै जानती हूँ" उसने डर से कहा, "तो आज वो मटियामेट होगा साध्वी!" मैंने कहा, वो चुप हो गयी और उठ ...
मैंने उसको एक उबटन दिया और कहा, "इसको स्नान से पहले अपने बदन पर लगा लेना, केवल योनि को छोड़कर" "जी" उसने कहा, फिर मै उठ कर बाहर चला गया, शर्मा जी ...
"नहीं ऐसा ना कहो, तुम मेरे जीवन की ऐसी पहली साध्वी हो जिसके लिए मेरा कामवेग मुझसे बिना आज्ञा लिए जागृत हुआ है!" मैंने कहा, "तो फिर शयन कीजिये जा!" उ...
"हाँ! अवश्य बैठ सकता हूँ, अवश्य! कोई विशेष कार्य है?" मैंने उसके साथ बैठते हुए कहा, "आपने मेरी खातिर व्योम नाथ से बैर लिया है" उसने कहा, "हाँ, तो?...
उसने हाँ में गर्दन हिलाई! मैंने तब उसके शरीर पर अपने थूक से निशान बनाए और मंत्राभूत किया! अब मुझे उसका आलिंगन करना था, मैंने एक महामंत्र पढके उसको आ...
"ऐ लड़की? तू जानती भी है? तू क्या कर रही है?" उसने तरुणी से कहा, तरुणी चुप रही, मैंने कहा, "जो कर रही है, सही कर रही है, और सुन व्योमनाथ के चेले, मे...
"हम्म! एक बात बताओ, मेरे साथ चलोगी? वहाँ क्यूँ जीवन नष्ट करती हो? जब तक व्योम नाथ का साया है तुम पर कोई कुछ नहीं कहेगा, लेकिन उसके बाद केवल संगिका ही ...
अब ये मेरे लिए आत्म-प्रतिष्ठा का प्रश्न उठ खड़ा हुआ था! व्योमनाथ ने उसको चेतनावृत भी नहीं किया था, ये एक कारण अपने आप में पर्याप्त था! अब द्धन्द आरम्भ...
"मैं व्योम नाथ के पास गत वर्ष से हूँ, पहले हिमाचल में थी, अब नेपाल में हूँ" उसने बताया "उसने तुमको चेतनावृत किया अभी तक? और यदि किया है तो मै तुम्हे...
"मैं तरुणी व्योम नाथ की हुँ, साधारण के लिए गौधरा!" उसने कहा, "व्योमनाथ का नशा चढ़ा है तुम पर!" मैंने कहा, "और आप पर? मेरा?" उसने मुझे चकित करने का...
प्रकार का कामाकर्षण सा हो गया था मुझे लालसा सी जाग गयी थी मुझमे वो जब वहाँ से गुजरी तो मैंने उसका मार्ग रोक लिया! मैंने कहा, "तुम जालेष व्योम नाथ के...
प्रकार का कामाकर्षण सा हो गया था मुझे लालसा सी जाग गयी थी मुझमे वो जब वहाँ से गुजरी तो मैंने उसका मार्ग रोक लिया! मैंने कहा, "तुम जालेष व्योम नाथ के...
