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“जब मर्जी चलिए, चाहें तो अभी चलिए” मैंने कहा, “ठीक है, मै क़य्यूम को कहता हूँ” वे बोले और क़य्यूम को लिवाने चले गए, हम वहीँ बैठ गए! और फिर थोड़ी देर ...
“हाँ एक औरत ने कहा था कुछ” वे बोलीं, “क्या?” मैंने पूछा, “पोते के लिए तरस जायेगी तू! ये बोली वो मुझसे!” ये बताया उन्होंने “अच्छा! उस औरत ने अपना...
सुबह उठे तो छह बज रहे थे, नित्य-कर्मों से फारिग हुए, नहाए धोये और आ बैठे बिस्तर पे! तभी हरि साहब आ गए, नमस्कार आदि हुई, साथ में नौकर चाय-नाश्ता भी ल...
मैंने घड़ी देखी, बारह चालीस हो चुके थे और अब मिलना संभव न था, अब मुलाक़ात कल ही हो सकती थी, सो मैंने उनको कल के लिए कह दिया और हम लोग फिर वहाँ से वापिस ...
“मामला क्या है?” क़य्यूम भाई ने पूछा, “बेहद उलझा हुआ और भयानक मामला है क़य्यूम साहब” मैंने कहा, “ओह….” उनके मुंह से निकला, “आपका अर्थ कि काम नहीं ...
अन्धकार में! वो नहीं! वो तो अन्धकार को लांघ चुका था! अन्धकार था मात्र मेरे लिए, शर्मा जी के लिए, रात थी मात्र मेरे और शर्मा जी के लिए, खेचर के लिए क्य...
हम वापिस चल पड़े, शंकर के कमरे की तरफ, और तभी पीछे से मुझे किसी ने आवाज़ दी, मेरा नाम लेकर! मै चौंक पड़ा! ठहर गया! पीछे देखा, वो खेचर था! खेचर वहीँ खड़ा...
वो चला गया था! अब मै पलटा वहां से और शर्मा जी के पास आया, वे भी हतप्रभ खड़े थे! बड़ी ही अजीब स्थिति थी! अभी तक कोई ओर-छोर नहीं मिला था! धूल में लाठी भ...
हतप्रभ इसलिए कि मेरे सभी मंत्र और तंत्राभूषण, सभी शिथिल हो गए थे! खेचर के सामने शिथिल! दो ही कारण थे इसके, या तो खेचर स्वयंभू एवं स्वयं सिद्ध है अथवा ...
मै ठहर गया! “कौन हो तुम?” मैंने पूछा, “क्या करेगा जानकार?” उसने जैसे ऐसा कह कर चुटकी सी ली! “मै जानना चाहता हूँ” मैंने कहा, “किसलिए?” उसने पूछ...
“आप न घबराइये हरि साहब, मै इसीलिए तो आया हूँ यहाँ” मैंने कहा, “हम तो मर गए गुरु जी” वे गर्दन हिला के बोले, “आप चिंता न कीजिये हरि साहब” मैंने कहा,...
“हाँ सब खैरियत से है” मैंने कहा, अब उन्हें चैन पड़ा! “शंकर?” शर्मा जी ने कहा, “जी?” वो हाथ जोड़कर खड़ा हो गया, “तुमने जो दो औरतें देखीं थीं, वो र...
“शर्मा जी, हिलना नहीं!” मैंने कहा, वे समझ गए! “कौन हो तुम दोनों?” मैंने पूछा, और तब एक औरत ने कुछ कहा, मुझे समझ नहीं आया कि क्या कहा उसने, बस एक...
खेल अब खूनी हो चला था! “सामने आओ मेरे?” मैंने कहा, कुछ पल गहन शान्ति! केवल झींगुरों की ही आवाज़, मंझीरे जैसे डर गए थे! “सामने क्यों नहीं आते?” मै...
“कौन है?” मैंने कहा, “कोई उत्तर नहीं! मै भाग के उसके पास गया और उसका हाथ जैसे ही पकड़ा उसने मुझे उसी हाथ से धक्का दिया और मै पीछे गिर पड़ा! मेरी कमर...
