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"हाँ! सोलह कपाल!" मैंने बताया! "वो किसलिए?" उन्होंने पूछा, "ये महा-विलाप साधना का अंश है! किसी औघड़ का सर्वनाश करने हेतु ऐसा साधन किया जाता है!" म...
"सही कहा आपने" मैंने कहा, रुद्रनाथ भोजन ले आया था, हमने भोजन किया और साथ ही साथ मदिरापान! मेरे मस्तिष्क में शोभना के ख्यालों के बुलबुले उठ रहे थे लग...
'आयेगा वो वक़्त भी शोभना, शीघ्र ही आयेगा!" मैंने कहा, वो चुप! "मैं अब चलता हूँ, भोजन उसी दिन करेंगे साथ साथ!" मैंने कहा! उसने मुझे देखा! गौर से!...
कौमार्यशील स्त्री के लिए! मेरे फेंफड़ों में जैसे वायु समाप्त हो गयी! गला रुंधने लगा, हलक सूखने लगा! मस्तिष्क जैसे जड़वत हो गया! । "मै जानना चाहती हू...
"मै अवश्य ही आऊंगा शोभना!" मैंने कहा, वो चुपचाप मेरी जकड़ में बंधी रही! "मै आऊंगा, तुम्हारे लिए!" मैंने कहा, "और अपने लिए नहीं?" उसने कटाक्ष सा ...
"तब तो और परेशानी होगी" मैंने कहा, "नहीं होगी" उसने कहा, "वाह शोभना!" मैंने कहा और उसका हाथ थाम लिया! "चाय-नाश्ता किया आपने?" उसने पूछा, "हाँ ...
"घबराइये मत! मेरे पास कूष्मांडा-सुन्दरी है!" मैंने कहा, "अभी बताया आपने" वे बोले, "मै इतनी आसानी से नहीं गिरने वाला शर्मा जी!" मैंने मुस्कुरा के क...
"हाँ" उसने कहा, "बुलाने दो!" मैंने कहा, "गुरु जी उसने काकड़ा-जोगिनी सिद्ध की है अभी, असम से" उसने बताया, "कोई बात नहीं, मेरे पास काट है उसकी" मै...
"लीजिये" रुद्रनाथ ने मुझे एक टुकड़ा दिया मांस का! "और भोग डाल!" मैंने कहा, उसने डाल दिया! वो भी ख़तम! "आज कल में मैं आपको सूचना दे दूंगा उनकी!" ...
"पता है" उसने कहा, "मै चलता हूँ अब शोभना!" मैंने कहा, अब वो मुझसे अलग हुई! मुस्कुराई मैंने उसका पल्लू उसके वक्षस्थल पर रखा और अपनी एक तुलसी-मा...
"जब मै विजयी होऊंगा तो अवश्य ही तुम्हारे पास आऊंगा वापिस!" मैंने कहा, उसने कोई उत्तर नहीं दिया! "परन्तु वहाँ नहीं!" मैंने ऊँगली के इशारे से मना कि...
मैंने उसको अपने कंधे से हटाया, उसके चेहरे को अपने दोनों हाथों में लिया! उसकी सुन्दर आँखों में झाँका! उसकी भौं में आई हुई उस नन्ही सी पसीने की बूंद को ...
"हाँ" मैंने कहा, "और यहाँ इस कक्ष में, ये क्या था?" उसने पूछा, अब मैं फिर से पछाड़ खा के गिरा! "वो.........मैंने बताया ना, की मुझमे काम जाग गया ...
परन्तु अब विवेक जाग उठा था! क्या गलत था और क्या सही! इस तराजू में मुझे गलत का पलड़ा भारी दिखाई दिया! मैंने अपने कामवेग पर काबू किया! मैंने अब उसके न...
रुद्रनाथ ने समस्त सामग्री दान की, अर्पित की, मेरी सामग्री भी उसी में ही थी, महा-दीप प्रज्ज्वलित हुई, इसी को महा-अलख कहते हैं! चिमटों की खड़खड़ाहट और '...
