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और उसके गुर्दे भी, फिर उनको उसी रक्त-पात्र में डुबो कर रख दिया और फिर अलख के सम्मुख बैठ गया! भुवन नाथ ने भी लगभग ऐसा ही किया था और बस अंतर ये था कि मै...
"स्वीकार है!" मैंने कहा, "अभी समय है" उसने कहा, "आगे बढ़!" मैंने कहा, "मेरा नाम भुवन नाथ है!" उसने कहा, "मै नहीं डरता तुझसे!" मैंने कहा, उसन...
अवसर है और कहीं हाथ से ये अवसर निकल ही न जाए! ये उनकी माया का अचूक प्रभाव था! सहसा मुझे मेरे गुरु-शिष्य ज्वाला नाथ का ध्यान आया, उन्होंने मुझे कांडप-क...
दिया घाड़ पर, फिर परिक्रमा की उसकी तीन बार! चिमटा छुआ कर भद्रांगी को शांत किया! वो अब हिलने लग गयी! घाड़ भी हिलने लगा! मैंने भैरवी आह्वान नहीं किया बल...
जाता है! ये भी परम शक्तिशाली एवं अभेद्य शक्ति है! तंत्र-जगत में इसकी गति सबसे अधिक है! एक क्षण के सौवें भाग में पृथ्वी की परिक्रमा कर लेती है शत्रु चा...
वार कुंद हो कर ओझल हो गया था! यहाँ उनकी स्थिति देख मैंने अट्टहास लगाया! औघड़-नृत्य करने लगा! मांस, चर्बी डाल कर अलख को ईंधन दिया! मेरी अलख मेरी जीवन ड...
रख दिया! कपाल-कटोरे में मदिरा डाली और उस कपाल के सर पर रख दिया! मंत्र पढ़े, आह्वान किया, और गटक गया! कपाल-भंजिनी प्रकट हो गयी! ये मसानी-शक्ति है! एक ह...
त्रिशूल तलवार की तरह से लहराया अलख के चक्कर काट काट कर और फिर तीन बार हवा में लहराया! अर्थात मै हार नहीं स्वीकार करने वाला! मै द्वन्द के लिए तैयार हूँ...
"भद्रांगी?" मैंने कहा, "बोल?" उसने चिल्ला के बोला, "मेरी रखैल है ना तू?" है या नहीं?" मैंने पूछा, वो बस कुत्ते की तरह से गुर्राती रही! अब मैंने ...
मै भी उठा और अलख उठा दी! अलख नमन किया और अलख भोग दिया! "साध्वी, वो मदिरा डालो दो पात्रों में" मैंने कहा, उसने डाली! एक गिलास उसको दिया और एक मैं...
भस्म लेप कर लिया! अब मै चला अरिका के ओर! मुझे देख आरिका खड़ी हो गयी, मैंने उसको पूर्ण-नग्न किया और उसके शरीर पर रक्त से चिन्ह अंकित किये और फिर उसकी य...
"मैं बता दूंगा, आप पहले अपनी क्रिया से निबट लीजिये" उसने कहा, "ठीक है" मैंने कहा, हमने खाना खा लिया! अब थोडा आराम करना था, सो लेट गए! आँख लग गयी! ...
"सुनो, क्रिया-स्थल में जैसा मै कहूँगा, करूँगा और करवाऊंगा उसमे कोई ना-नुकुर नहीं होनी चाहिए, स्वीकार है?" मैंने पूछा, "जी" उसने कहा, "कोई शंका हो ...
"किसी से कोई प्रेम-प्रसंग तो नहीं?" मैंने पूछा, "नहीं" उसने कहा, "कभी पुरुष-संसर्ग किया है?" मैंने पूछा, "नहीं" उसने बताया, "कभी किसी पुरुष को...
ग्यारह बजे करीब रुद्रनाथ एक चिलम को और एक साध्वी को ले आया, साध्वी ठीक थी, देह उसकी उन्नत थी, उम्र होगी कोई बीस-इक्कीस वर्ष, मैंने रुद्रनाथ और शर्मा ज...
