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मिट्टी से नहीं!साँपों से!बड़े बड़े साँपों से!पंख वाले अनोखे सांप!मैंने कभी नहीं देखे थे ऐसे सांप!ये,अवश्य ही, या तो जैन-तंत्र था,अथवा उच्च-स्तरीय बौद्ध ...
"चल! आगे बढ़!" मैंने कहा,"अब तू बढ़!" मैंने कहा,वो हंसा!बहुत तेज!"देख फिर!" वो बोला,मित्रगण!उसने अपना खंजर उठाया,और अपने चारों और,खोदना शुरू किया,मंत्र ...
मुझे अभी तक,भरमाये हुए थी!कभी द्वैपा!कभी बच्चा!"द्वैपा! आगे आ! चल उठ! आगे बढ़!" वो बोला,और भीषण अट्ठहास किया!मित्रगण!पहली बार मैंने थूक गटका!पहली बार भ...
वास्तव में,बाबा जागड़,अद्भुत औघड़ है!बहुत अद्भुत!न मैंने पहले कभी देखा,और न सुना!क्या लगन थी उसमे!जब भिड़ जाता,तो अपने प्रतिद्वंदी को,खाली ही करता,फिर क्...
यहां बाजी मार ली थी बाबा जागड़ ने!मैं हैरान था!अचंभित था!कालखंडा मानव आयु के,पचपन वर्ष व्यतीत होने पर,सिद्ध की जाती है!इसकी सिद्धि,महा-सिद्धि कही जाती ...
और फिर!आकाश चीरती हुई एक सर्प सी रेखा,वहाँ प्रकट हुई!और ज्वाल-मालिनि,उस घूमते हुए थाल पर,आ विराजित हुई!अब मैं लेट गया!प्रणाम किया,भोग सम्मुख किया,त्रि...
स्निग्ध हो गयी!फूल बिखरने लगे!पृथ्वी कांपने लगी!पेड़ और पौधे,शांत हो गए!वो प्रकाश,निरंतर बढ़ता रहा!और मैं अब,उन सभी उप-सहोदरियों के मध्य खड़ा था!महा-रूक्...
सब बताये जा रहा था उसे!अट्ठहास हुआ बाबा जागड़ का!मैं उस महा-रौद्र शक्ति के,आह्वान में जुट गया!लगातार ईंधन झोंकता रहा,मांस को अभिमंत्रित करता रहा!मदिरा ...
उसने वो कटा सर उठाया,और ऊपर उछाला!सर ने अट्ठहास किया!और नीचे आने से पहले,वो बोला, "मैं गोपी हूँ! मैं गोपी हूँ!" और लपक लिया बाबा जागड़ ने!ये क्या?कोई म...
और अगले ही पल लोप हुई!और ढुढौनी उड़ पड़ी!जा लगी उसके पीछे,वहाँ वो बाबा जागड़,सब देख रहा था!कपाल-रूढ़ा लोप हुई तो,झट से मन्त्रों में पोषित किया उसने स्वयं ...
कभी अनुपम काम-सुंदरी,कभी प्रौढ़ स्त्री,और कभी वयोवृद्ध!पर इसके वार अचूक है!शीशम के पेड़ पर,यही चौदह रात्रि,मध्य-रात्रि में,उसके तने पर,इसका बीज मन्त्र प...
ये क्लिष्ट साधना सम्पूर्ण हो सकती है,अन्यथा नाश सम्भव है!कपाल-रूढ़ा का आह्वान ज़ारी था,और यहां वाचाल के स्वर गूंजे,ढुढौनी!अति क्रूर!माँ रौद्र!कृशकाय!भक्...
ऐसा माहौल यहां!और तभी कर्ण-पिशाचिनी के स्वर गूंजे!कपाल-रूढ़ा!ओह!तो अब कपाल-रूढ़ा का आह्वान किया जा रहा था!कपाल-रूढ़ा, श्मशानी शक्ति है!चालीस रात्रि साधना...
फि से भरा वो कपाल-कटोरा!मुंह में भरी,और अलख में झोंक दी!अग्नि लपक पड़ी उसके मुंह की ओर!अब बैठा आसन पर जागड़!और लिया डमरू!और लगाया मुंह से अपने!कुछ ताल स...
मैंने फिर से देख लड़ाई!उसने देख पकड़ी!वो खड़ा था!आकाश की ओर,दोनों हाथ किये!और फिर घुटनों पर बैठा!अचानक से मैंने देखा!कि उसकी आँखों से आंसू टपके!क्यों?मैं...
