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एक मौक़ा!एक मौक़ा और दिया जाए उसे,यही सोचा!"एक वायदा करता हूँ, जिस रोज, ये दर्द, बला से बर्दाश्त हो जाएगा, मैं आपके दर आ बैठूंगा, मेरा साथ दीजियेगा, मैं...
चूंकि,अब वो जान गया था प्रेत-रहस्य!थका-मांदा,हारा हुआ,टूटा,मायूस,घोड़े से उतरा वो,और धीरे धीरे सामने आया,आँखों में मोटे मोटे आंसू लिए,"मैं जान गया हूँ ...
इसमें खतरा था,इस रास्ते तक तो,वो जानता था सबकुछ,लेकिन अब न जाने कितने ही ऐसे आलिम और क्षुद्र तांत्रिक,होंगे जो पकड़ना चाहेंगे उसको,वो बहुत काम का था उन...
इसको इसके,इस दुःख से निजात दिल अब!ले ले इसे अपनी पनाह में!ये दुनिया,नहीं बची इसके लिए अब!कोई नहीं ऐसा आज,इस जैसा!ऐसा भला, और ये सिला?नहीं!और नहीं!मैं ...
ये कैसी पहेली!डेढ़ सौ बरस?नामुमकिन!"खान साहब! बहुत वक़्त गुजर गया है! डेढ़ सौ साल!" मैंने कहा,वो ऐसा कि,जैसे अभी रो ही पड़ेगा!"खान साहब, अब न शाह साहब हैं...
"यहां पहुंचे?" मैंने पूछा,अब अटका वो हलकारा!नहीं पहुंचा वो!कभी नहीं पहुंचा!वो उस अदृश्य योनि में प्रवेश कर चुका था!इसे द्रिक-अवस्था कहते हैं!इसकी व्या...
नथुने फड़क उठे!कहीं खो गए खान साहब!मुझे तो पता था,लेकिन उनको नहीं!मैंने हल्कारे के हाथ पर हाथ रखा,मेरा हाथ झप्प से थाम लिया उसने,उसका मोटा, मांसल हाथ, ...
ये रास्ता नाप रहा था!कभी बरेली नहीं लौटा था!जब तक,मौलाना साहब को,नहीं ढूंढ लेगा,नहीं लौटेगा!मुझे,जल्दी ही कुछ करना था!बहुत जल्दी!समय भागे जा रहा था,मे...
"वाक़ई! बहुत लज़ीज़ है! चूना भी ऐसा है, जैसे मक्खन!" मैंने कहा,"हाँ! चूना बेहद ख़ास लगाते हैं वो साहब!" वो बोला,वो मुस्कुराया,मैंने उसे,एक बार में ही पूरा...
कितनी सादगी!मैंने उसका दिल रखने के लिए,एक रोटी उठायी,एक शर्मा जी ने,और फिर शक्कर ली,रोटी पर रखी,और खाने लगे!"खान साहब, आप भी तो लीजिये?" मैंने कहा,"आप...
फौजी जूते!उसमे तस्मे ऐसे थे, कि,एक भैंस भी बाँध लो उनसे!ऐसे मज़बूत!"ये लीजिये" वो बोला,ये एक घड़ा था,छोटा सा घड़ा,पानी था इसमें,मैंने ओख बनायी,और पानी पि...
मांसपेशियां बहुत सख्त थीं!अच्छा साईस भी रहा होगा ये हलकारा!अभी भी,उस घोड़े के बदन पर,खरैरा करने के निशान मौजूद थे!"आइये हुज़ूर" बोला हलकारा,"चलिए खान सा...
चिल्ला कर!"खान साहब?""खान साहब?"दूर से कहीं,घोड़े के हिनहिनाने की आवाज़ आई!और सामने से,दूर सामने,एक घुड़सवार आते दिखाई दिया!घोडा, सरपट भागे जा रहा था!एक ...
आगे बढ़ रहा था,तभी एक गुहेरा दिखा!काफी बड़ा था वो!हमे ही देख रहा था!वो आगे बढ़ा,और हम रुके,मैंने फ़ौरन एक डंडी तोड़ ली,और कर दी उसकी तरफ!अब शर्मा जी ने,एक ...
अछूता स्थान था ये!और तभी मेरी नज़र,एक टूटे हुए से,मंदिर पर पड़ी!अब कुछ शेष नहीं था वहां,मात्र उन दीवारों के सिवाय!टूटे पत्थर,नीचे गिरे थे!पास में ही,दीम...
