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उन्होंने फ़ौरन ही जेब से अपनी,अच्छे-खासे पैसे दे दिए उसको!वो तो खुश!आज तो बिना कुछ पूछे ही,उसके पापा मेहरबान थे!उन्होंने अपनी नौकरानी को आवाज़ दी,फल काट...
वही कागज़,जो नीलेश ने दिए थे उन्हें,कागज़ उठाये और पढ़ने लगे,वही दवाइयाँ थीं,वही की वही!आज बदल दीं थी उन्होंने!तभी उनका फ़ोन बजा,उन्होंने फ़ोन उठाया,ये मंज...
अशोक की दवाइयों के कारण!उन दवाइयों के कारण बच न सका था वो,प्रमाण सामने था उनके,न जाने क्या हुआ कि,दवाइयाँ बदल दीं उन्होंने!डॉक्टर आशा को बुलाया,और बता...
चले वापिस,भारी सर लिए,और आ बैठे,अपने कमरे में,पानी पिया, और कुछ कागज़ जांचने लगे.. वे कागज़ जांच रहे थे,इसी सुशील के,दवाइयाँ देखीं,चौंक पड़े!लगा कि जैस...
ऑंखें बंद कर लीं,और करवट बदल ली,और आँख लग गयी उनकी,मंजुला जानती थी,कि वे परेशान हैं,सुशील को लेकर,इसीलिए कोई बात नहीं की उसने,और वो भी सो गयी,सुबह हुई...
बड़े बड़े, चार पैग खींच मारे,ग्यारह बज रहे थे,तभी बाहर का दरवाज़ा खुला,गार्ड ने दरवाज़ा खोला,मंजुला आ चुकी थी,गाड़ी पार्क की उन्होंने,और सीधा डॉक्टर साहब क...
और फिर अपनी वो स्कॉच की,बोतल उठायी,अपनी नौकरानी को आवाज़ दी,वो आई,तो कुछ फल काटने को कह दिया उस से,वो चली गयी,थोड़ी देर बाद फल काट लायी,और रख दिए वहीँ म...
"कल आ जाओ नीलेश" वे बोले,"इसी समय?" पूछा उसने,"हाँ, इसी समय ठीक रहेगा" वे बोले,"जी डॉक्टर साहब" वो बोला,और अपने आंसू पोंछता हुआ,चला गया बाहर,खिड़की से ...
सिसकी भरी,और फिर अनुज साहब को देखा,"डॉक्टर साहब, मुझे लगता है कि जब वो वापिस आ रहा था, उस रात जयपुर से, तो यहीं गुड़गांव में उसको दर्द उठा होगा, इसी का...
"हाँ नीलेश" वे बोले,"कुछ ख़ास दिखा आपको?" उसने पूछा,"नहीं, कुछ ख़ास नहीं" वे बोले,"कोई बीमारी?" उसने पूछा,"नहीं, कोई गंभीर बीमारी नहीं" वे बोले,"लेकिन अ...
कोई गंभीर बीमारी नहीं थी,वे एक एक करके,सभी कागज़ देखते रहे,चिकित्सकों ने,खून भी चढ़वाया था,उन्होंने फिर से पहला पृष्ठ लिया,नाम पढ़ा,मरीज़ का नाम अशोक था,उ...
उम्मीद से अधिक इच्छा रखते हैं!"बताओ नीलेश?" बोले वो,"डॉक्टर साहब, मेरा नाम नीलेश है, मैं दिल्ली में रहता हूँ, मैं ड्राइवर हूँ. अक्सर, शहर से भार आता ज...
और तभी,उन मालती के पौधों के बीच में से,एक तीस साल का व्यक्ति सामने आया,भीगा हुआ, कमीज पहने, सफ़ेद रंग की,नीचे जीन्स पहने, नीले रंग की,बाल हल्के थे उसके...
अभी तो आवाज़ आई थी?कौन है?फिर से वहम?वहम तो एक बार हुआ तो माना,लेकिन यहां तो कोई,गरीब, मज़बूर, रो रहा था!अब कहाँ था वो?उफ़!क्या पहेली है ये?वे वहीँ बैठ ग...
रात बेरात कौन आ जाए ज़रूरतमंद,पता नहीं था,यही सोचा था उन्होंने कि,कोई आया होगा!आँखें बंद कीं,आधा घंटा बीता,खर्राटे आरम्भ हुआ डॉक्टर साहब के,और फिर से आ...
