श्रीशः उपदंडक
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@1008
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

बिना कुछ कहे! बिना जताए! कौन है ऐसा खुशनसीब तेरे जैसा इथि! कौन! कोई नहीं! तू तो विशेष हो गयी! आंसू झर झर बहें! सुचित वहाँ से हट गया! ह...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

आज बेसब्र थी इथि! वे आये, रहे होंगे कुछ ही दूर! भाग पड़ी इथि! तेज! उनकी तरफ! वे ठहर गए! और फिर सम्मुख आयी! अपने लरजते होंठों को संयत किया, ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

और बाबा उसके पीछे पीछे, चेलों संग! हाँफते, दौड़ते भाग रही थी इथि! उसी वृक्ष के पास! आज अपनी सखी को भी न लायी थी! पहुंची वृक्ष के पास! बाबा जा...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

“अब क्या होगा बाबा?” पिता ने पूछा, “कुछ नहीं” बाबा ने कहा और युक्ति सुझा दी उनको! “मुक्त कर दो लड़की को! जहां जाना चाहे, जाने दो!” बाबा ने कहा, द...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

क्या करे और क्या न करें! “ठीक है! तू जो कोई भी है, मैं उठाता हूँ तुझे!” बाबा ने कहा और आँख बंद कीं! और तभी! तभी वहाँ तेज पवन बहने लगी! सारा सा...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

बाबा ने अलख तैयार की! सारा सामान संजो कर रख दिया अलख के पास! एक चेला दायें बैठा और एक बाएं! और अब बाबा ने अलख उठायी! रुकिए! रुकिए! ये क्या...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

ये शक्ति है क्या? कौन है? पता तो करना होगा! “ऐ लड़की, क्या नाम है तेरा?” अब बाबा ने गुस्से से पूछा! इथि चुप! उस भोली को तो ये भी नहीं पता कि क्...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

बाबा ने आँखें बंद कीं! और एक मंत्र जागृत किया! एक चुटकी मिट्टी उठायी और सामने दे मारी इथि पर! ये क्या! बाबा जैसे उछल पड़े! उनके चेले स्तब्ध! ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

कौन सुने! बेचारी इथि! बहुत बुरा बीता समय इथि का! समय का ज्ञान ही न रहा! कब रात हुई कब सुबह और कब मध्यान्ह! उसके केवल मध्यान्ह का समय ज्ञात रहा...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

अंधी! प्रेमान्ध! इथि को रोता देखा माँ भी रोये, पिता भी चेहरा फेरे! बड़ा भाई भी उठ जाए वहाँ से! माँ! एक बार! पिता जी! एक बार! भैया! एक बार...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

पुष्प देने के लिए! वो वहाँ नहीं होगी तो……..? क्या सोचेंगे? नहीं! नहीं! मुझे जाना ही होगा! दरवाज़ा पीट लिए उसने! चीखी-चिल्लाई! अब कौन सुने...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

सख्ती से समझा दिया गया! अब चुप इथि! क्या हो अब? ऐसे तो दम घट जाएगा! मर जायेगी इथि! देह ही तो यहाँ हैं, परन्तु जीवात्मा तो वहाँ है! विपुल...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

और ओझ पाँव पटकता चला गया वहाँ से! कल वो बनारस जाएगा! इथि का इलाज करवाने! घर में जैसे सन्नाटा पसर गया! साफ़ साफ़ ताक़ीद कर दी गयी कि इथि कहीं बाहर न...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

भेज दिया गया! माँ और पिताजी अब चिंतित! भयाक्रांत वो ओझा भी! उठ बैठा वो चारपाई से! “उठो, मेरे संग बाहर आओ” उसने इथि के पिता जी से कहा, वे उठे...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

माँ दौड़ के गयी अंदर इथि के पास, वो सो गयी थी! सोयी नहीं थी, विचरण कर रही थी! कहीं और! संध्या हुई! पिता जी ले आये एक ओझे को! गाँव का ही ओझा था वो...

2 years ago
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