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मंदिर के पास एक घर, बस! वो चलती गयी उस मार्ग पर! वृक्ष पार हुए! मार्ग छोटा हुआ! मंदिर का आकार बड़ा हुआ! वो चलती गयी, गाँव में प्रवेश कर गयी! ...
कहाँ लौट जाओ? कैसे? अंतर्द्वंद में फंसी अब! “लौट जाओ इथि” विपुल ने कहा, इथि ने नेत्र बंद किये! अश्रु की कुछ बूँदें नेत्र-पटल से न चाहते ...
कोई प्रतिक्रिया नहीं दी इथि ने! प्रेम न जाने काया! प्रेम न जाने माया! “मुझे प्रेम करती हो?” विपुल ने पूछा, “हाँ” उसने अब स्वीकारोक्ति की! “मैं...
हरियाली! प्रकृति अपने चरम पर! सुगन्धित वनस्पतियां! छोटे बड़े दिव्य-पुष्प! शीतल मंद बयार! क्या ये स्वर्ग है? यही सोचा इथि ने! वो हैं कहाँ?...
हाँ! स्त्री यही देखा करती है पुरुष में! सरंक्षण! यही असीम प्राप्त हुआ इथि को! वक्ष-स्थल से लग कर नेत्र बंद कर लिए इथि ने! पावन प्रेम! और अ...
सभी ने देखा! सुसज्जित! सभी ने आवाज़ दी! लेकिन इथि! ये जा और वो जा! सीधा पहुंची तालाब पर! अकेली! और सांस लेने लगी! बैठ गयी वहाँ! अभी म...
विरक्ति से प्रेम हुआ या प्रेम से विरक्ति? कोई कैसे समझे! और वो कैसे समझाए! अब तो माता-पिता भी हार गये थे! क्या करें? कैसी विकट स्थिति थी! वे भी ...
‘पता नहीं’ से प्रेम? इतना अटूट और प्रघाढ़ प्रेम? ऐसा कैसे सम्भव? “जवाब दे बेटी, कौन है वो?” पिता जी ने पूछा, अब चुप इथि! क्या बोले! उसे तो ...
परेशान! अब इथि इथि नहीं है! वो तो अब धरोहर सी हो गयी है! इस घर में! पिता जी अब चले इथि के पास! बात ही कर लें इथि से! पहुंचे, इथि लेटी पड़ी ...
उपयुक्त समय भी आएगा मित्रगण! इथि चलती गयी! सीधा! देवालय पहुंची! और पुष्प अर्पित किये! वहाँ से अपने घर पहुंची! सीधे अपने कमरे में! और बिस...
डलिया ली इथि ने! “जाओ इथि, अब घर जाओ” विपुल ने कहा, घर कैसे जाए? घर पर तो सभी शत्रुवत हो चुके हैं? अपने नेत्रों में लिख दिया ये इथि ने और पढ़ ल...
“नहीं बतायेगा? तो देख!” बाबा ने कहा और ऐनत्रास मंत्र पढ़ दिया! मंत्र पढ़ते ही काट हुई और वे तीनों उछल के पड़े पीछे, झाड़ियों के मध्य! अब इथि ने देखा उन्...
कुछ देर ऐसे ही और रहे! फिर अपने हाथ से अश्रु पोंछे विपुल ने इथि के! गान्धर्व ने मानव-अश्रुओं का मोल जान लिया था! “क्या हुआ इथि?” अब पूछा विपुल न...
बिना कुछ कहे! बिना जताए! कौन है ऐसा खुशनसीब तेरे जैसा इथि! कौन! कोई नहीं! तू तो विशेष हो गयी! आंसू झर झर बहें! सुचित वहाँ से हट गया! ह...
आज बेसब्र थी इथि! वे आये, रहे होंगे कुछ ही दूर! भाग पड़ी इथि! तेज! उनकी तरफ! वे ठहर गए! और फिर सम्मुख आयी! अपने लरजते होंठों को संयत किया, ...
