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क्रिया हुआ करती थी, इसमें वो तृप्तिका उनकी समस्याएं का निबटारा किया करती, उनको गूढ़ ज्ञान दिया करती" वे बोले और रुके,ये तो होता ही है, भोग अर्पित तो कि...
दादा और पोते का प्रेम तो बहुत पावन हुआ करता है! एक ऐसा प्रेम जिसमे दादा अपने जीवन को स्वयं ही पुनः अपने जीते जी जिया करता है! कुछ ऐसा ही प्रेम था बाबा...
खेमचंद! खेमा! लेकिन था? अब नहीं है क्या? अब जीवित नहीं?"क्या खेमा जीवित नहीं?" मैंने पूछा,"वो जीवित होता, तो आज ये नौबत ही न होती" वे बोले,फिर से ज़ंजी...
"उम्मीद है आप सब समझ गए होंगे" वे बोले,"हाँ, समझ गया हूँ" मैंने कहा,"हम्म" वे बोले,खांसी और अपना मुंह पोंछा उन्होंने,"लेकिन बाबा?" मैंने कहा,"हाँ?" वे...
चली गयी,"ये बात बाबा अमर नहीं बता रहे थे!" वे बोले,"हाँ, यही कारण है" मैंने कहा,"कोई चूक हुई होगी" वे बोले,"अब पता नहीं" मैंने कहा,"चलो मिलकर पता लग ज...
उन्होंने जैसे ही बोला, वैसे ही मैं उछला! इसके तो बहुत मायने निकलते थे! एक साथ वो सारे मायने मेरे सर में घुसने लगे! मैं खुद ही उलझ के रह गया था अब!शर्म...
एक प्रश्न का उत्तर मिला! और फिर दूसरा उतपन्न हो गया! उत्पन्न होना आजमी ही था! ये एक ऐसा गूढ़ विषय था जिसके बारे में मैंने कभी सुना ही नहीं था! और जिज्ञ...
घूर रहा था!एकटक देखे जा रहा था!"बड़े से बड़े साधक, मात्र उँगलियों पर ही गिनी जाने वाली अप्सराओं के बारे में जानते हैं! जैसे मेनका, उर्वशी, रम्भा आदि आदि...
"वैसे बाबा ये तृप्तिका अप्सरा..........?" मैंने कहा, लेकिन मेरी बात काट दी बीच में ही बाबा गिरि ने! उनकी आँखें चौड़ी हो गयी थीं और चेहरा गंभीर, हालांकि...
"यहां बाढ़ तो नहीं आती?" मैंने पूछा,"नहीं, कभी नहीं आई" बताया उन्होंने,पीछे बरसाती नदियां उफान पर थीं, बड़ी नदी में भी पानी बढ़ ही रहा होगा!"एक बात बताइय...
"पता नहीं, क्या माज़रा है" मैंने कहा,"पूछो तो बता दूंगा, बता दूंगा" वो बोले, जूते उतारते हुए,"वैसे एक बात अजीब है" मैंने कहा,"वो क्या?" उन्होंने पूछा,"...
"रुको" बोले बाबा,मैं रुक गया,"अभी बैठो" वे बोले,मैं फिर से बैठ गया,कविश ने बची-खुची बोतल भी उड़ेल दी गिलासों में, सो अब वो खाली किये! कलेजी के जो टुकड़े...
और तभी हंडे की बत्ती कम हुई! धीरे धीरे कम होती चली गयी! शायद गैस खत्म हो गयी थी, यही वजह थी, अब बस हलकी सी रौशनी थी, और कुछ नहीं! तो डिबिया जलानी पड़ी ...
अब ये तो वही बात हुई, कि इशारा करके बुलाया और जब आया तो भड़ाक से दरवाज़ा बंद! मैंने अब भी नहीं समझ सका था कुछ भी! बाबा अमर नाथ ने कुछ नहीं खोला था अभी त...
"तो फिर?" मैंने पूछा,"तृप्तिका एक अप्सरा नहीं है! वो स्वयंभू महाशक्ति है! जैसा मैंने पहले बताया, वो साधक को उसी रूप में दर्शन देती यही, जैसी उसकी मनोद...
