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"बेचारे" वे बोले, "हाँ, लाचार" मैंने कहा, "अब भूमिका देखनी होगी उस मदना की!"वे बोले, "हाँ, वो बंद था, यहां कैसे आया?" मैंने कहा, "हाँ, वही" वे बोले, उ...
और तभी आया वहाँ मदना! इस बार गुस्से में था वो! "बाबा?" बोला मदना! "मना करो, कंडु को मना करो!" बोला मदना, बाबा उठे, आये सामने मदना के! क्रोधित! "मदन...
आवश्यकता?" बोला वो, "आवश्यकता?" अब खड़े हुए बाबा, और बढ़े उसकी तरफ, मदना ने सर झुका लिया नीचे, "दिज्जा वहाँ नहीं रहेगी, समझा?" बोले बाबा, "कोई आवश्यकत...
आवाज़ का स्रोत वो गड्ढा ही था, लेकिन वहाँ मात्र एक सुरंग थी, जो अब खुदवा दी गयी थी, और उसके नीचे एक संकरा सा रास्ता ही था, अन्य कुछ नहीं! ये रास्ता...
जैसे ही चले, बाबा बैज के सभी साथी, उनके साथ चल पड़े, बाहर तक छोड़ने! रह गए बाबा वैज वहाँ! और उन झोंपड़ों में से वो बीस-बाइस आदमी, अपने अपने हथियार लेक...
उस सुरंग में मिली थी, लहूलुहान सी, कुछ और भी स्त्रियां थीं वहाँ! और हाँ, वो किशोर, केषक, वो भी आ रहा था उनके साथ, अठारह का रहा होगा उम में! मैं उसके क...
सा जल, सभी अपने अंजुल में डाल पीते चले गए। ये शायद अफीम का घोटा था! "दिज्जा यहीं है?" बोले बाबा लहटा! "हाँ!" बाबा वैज बोले! "क्यों?" बाबा लहटा ने पूछा...
थे, जब सामने किये, तो हाथ बंधे हुए थे उसके, उसके स्तन छिले हुए थे, घाव बने थे, कंधे पर और चेहरे पर छिलने के निशान थे, "क्या नाम है तुम्हारा?" मैंने पू...
लपक के खड़े हो गए! "कौन है?" मैंने कहा, उत्तर नहीं मिला, बस स्दन अब सुबक में बदल गया था! "आओ" मैंने कहा, "चलो" वे बोले, हम आगे बढ़े, और उस जगह आये, ...
सुनाई दिए, दरअसल समझ में आई, एक दिज्जा और दूसरा नाम था बाबा बैज का! औरत कुछ बोलती, और मदना उसकी हाँ में हाँ मिलाता! फिर कुछ ही देर में, बाबा लहटा आये ...
हमारे पास जूते हैं, फिर भी आधा किलोमीटर दौड़ने पर ही जीभ बाहर निकल आती है। इसीलिए कहा कि मेरी बुद्धि इतनी कुशाग्र नहीं थी, कि मैं हल जोड़ता! हालांकि, ...
और रुक गयीं, ये एक कुण्ड सा था, अधिक बड़ा नहीं था, छोटा सा, पास में ही कुछ पिडियां थीं, अब वे स्त्रियां वहां रुक गयीं, और पूजा-पाठ आरम्भ हुआ, साथ लायी...
वौ हाथ है, वही केषक!" मैंने कहा, "अच्छा !!" वे बोले, "तो बाबा समाधिलीन हो चुके थे, बाबा बैज के सामने ही?" वे बोले, "हाँ, हो चुके थे, और ये डेरा उन्...
. . . .. . . . . . . . लेकिन अब एक बात और, बाबा त्रिभाल कौन हैं? और हैं कहाँ? इतनी बड़ी घटना हो रही है, घटनाक्रम लगात...
और अब मैं ऐसी जगह पहुंचा था, जहां घर ही घर बने थे! लोगबाग इकडे हुए खड़े थे, कोई लाठी-डंडा तो नहीं था, न ही कोई शस्त्र! और तभी मुझे बाबा वैज दिखे!! ...
