श्रीशः उपदंडक
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@1008
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

बहुत काम बाकी था! पल्ली की ज़िम्मेवारी थी घर की! कल विदा होनी थी इथि घर से! उस रात! इथि कमरे की खिड़की से अंदर झांकते चाँद को देखती रही! पल्ली...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

देवालय पहुंची! पुष्प अर्पित किये! और फिर, और फिर पल्ली संग वापिस आ गयी अपने घर! मंडप सजा था! उसने सबकुछ देखा! अपनी माँ को देखा! अपने पित...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

“पिता जी, क्या मैं आज अंतिम बार तालाब पर जाऊं?” पिता जी स्तब्ध! कहीं फिर से विक्षप्ति न आ जाए? कहीं फिर से इथि में परिवर्तन न आ जाए? कहीं रंग ...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

आप हार गए! हार गए आप! सच कहता हूँ! हार गए आप! और फिर मित्रगण! ब्याह के दिन से एक दिन पहले…………….. और फिर एक दिन पहले मित्रगण! सुबह सु...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

मित्रगण! कई मध्यान्ह गए! कई आये! अब इथि के मध्यान्ह मात्र उस कक्ष में गुजरते! खिड़की से बाहर झांकते हुए! कभी कभार तो सूर्य पर टिकी दृष्टि चाँ...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

इथि, सुन, अब बहुत हुआ, हमसे सहन नहीं होता अब, बर्दाश्त की हद हो गयी, अब मेरा फैंसला सुन, मैं जाकर उदय के घर, बात पक्की कर देता हूँ, एक शुभ बेला में ते...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

ऐसा वर दुबारा कभी फिर नसीब हो न हो! नहीं! अब और नहीं! बस! बहुत हुआ ये प्रकरण! अब जो हो सो हो! गाँव भर में उपहास उड़ाया जाता है! बोलने वाल...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

वो कह के गया था! वापिस न आने के लिए! नहीं आया कभी! लेकिन! इथि अभी भी, ह्रदय के किसी कोने में ये माने बैठी थी कि, एक न एक दिन, आएगा वो! अ...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

क्या खेल खेला था इथि के भाग्य ने इथि के साथ! “मैं दुबारा आ जाऊँगा!” उदय ने खड़े होते हुए कहा, “अवश्य बेटा!” इथि की माँ ने कहा! वे चले गए! सारा ...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

“देख इथि, ऐसा वर कभी नहीं मिलने वाला, तरसते हैं लोग अपनी कन्याएं ब्याहने के लिए, ऐसे वर नहीं मिलते फिर भी, इकलौता लड़का है, तू राज करेगी, रानी बनके रहे...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

कौन कन्या नहीं चाहेगी? और ये तो वर स्वयं आया है! भाग खुले हैं इथि के! और फिर अंदर भागी माँ बुलाने इथि को! इथि लेटी पड़ी थी! माँ ने उठाया, न...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

देखने वाले देखते रह गए! जो जहां था वहीँ ठहर गया! जिसने देखा वो वहीँ रुक गया! और फिर वे घोड़ागाड़ियां रुकीं इथि के घर के आगे! सभी देखने लगे! आस...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

उदय का सीना गरम हो चला था! प्रेम ने पाँव पसार लिए थे! अगन भड़कने लगी थी! बलभद्र को देखते ही खड़ा हुआ और उस तक पहुंचा! बलभद्र ने बताया उसको इथि क...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

उठी इथि! हताश! परन्तु मन में प्रतीक्षा लिए! उसकी, जो कहा कर गया कि, कभी वापिस नहीं आयेगा अब! अब तक नहीं आया था! उधर, बलभद्र ने उदय की ...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

“कोई है क्या आपके संग?” उदय ने पूछा, कोई उत्तर नहीं! “किसी की राह देख रही हैं?” उसने पूछा, इथि ने उसको देखा और हाँ में गर्दन हिला दी! चलो कुछ ...

1 year ago
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