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और अगले ही पल! अगले ही पल जब आँखें खोली मंगल ने, तो हैरत में पड़ गया! वहां, पर्वत ही पर्वत थे! हिमाच्छादित पर्वत! सौंदर्य था वहां! अलौकिक सौंदर्य! "ये...
मंदिर, कभी नहीं हट सका! कभी भी नहीं! आज तक नहीं! सड़क, नहर के पुल से होकर जाती हैं अब! मैंने देखा है ये सब! कोई चार दिन बाद, सड़क निर्माण कार्य आरम्भ ...
किया करती है! वही तो है नश्वरता की सबसे बड़ी शत्रु और सूचक! वही लगाएगी ये छाप! मैं तो सिहर जाता हूँ कल्पना करते है! मानव मन है,न जाने कहाँ कहाँ छलांग ...
और ले आया उसको! सामान ले लिया था, कक्ष में रख दिया! भागा, पानी लाया सकोरे में घड़े से, दिया उसे! "ले,पी!" बोला वो! बुधवि ने पानी लिया और पिया। "दो दिन...
और ले आया उसको! सामान ले लिया था, कक्ष में रख दिया! भागा, पानी लाया सकोरे में घड़े से, दिया उसे! "ले,पी!" बोला वो! बुधवि ने पानी लिया और पिया। "दो दिन...
अकेला था, लेकिन वो अब कभी अकेला नहीं था। अकेला तो उसको छोड़ती ही नहीं थी वो बधवि! कैसे छोड़ती! प्रेम की मारी थी। जो हाल मंगल का था, उस से बुरा हाल बुध...
अकेला था, लेकिन वो अब कभी अकेला नहीं था। अकेला तो उसको छोड़ती ही नहीं थी वो बधवि! कैसे छोड़ती! प्रेम की मारी थी। जो हाल मंगल का था, उस से बुरा हाल बुध...
. . किसको दिखाए? कहाँ जाए? क्या करे??? "जा! और जल्दी आना। मैं नहीं रह सकता तेरे बिना, जानती है न?" बोला वो! हाँ! सब जानती है मंगल! वो सब जानत...
नहीं कह सकता! यदि था, वो मेरे ईश! मुझे हर जन्म में पागल ही बनाना! नहीं देना ज्ञान! कुछ नहीं देना! बस, पागल बनाना! मंगल जैसा पागल! सभी को! सभी को! लेकि...
तुझे तो सब पता है!" आहिस्ता से बोला मंगल!! सब! हाँ! सब पता है बुधवि को! अपने हाथ देखे बुधवि ने! मंगल बहुत खुश था! उसको खुश देख, बुधवि बहुत खुश! "बुधवि...
कांच की दुकान से हीरा खरीदने पहुँच गया दुकान! मिल गए हरि चाचा! "आ मंगल आ! बहुत दिन बाद आया! कैसा है?" बोले चाचा, "ठीक हूँ" बोला मंगल! चाचा ने सोचा, पा...
"क्या हुआ?" पूछा बुधवि ने! उसकी चिंतित होते देख, उस यक्षिणी के प्राण जाते थे जैसे! पल भर में ही, सिहर सी उठती थी वो!! मंगल से हाथ छुड़ाए! और उसका चेहर...
. . .. . . . . . . "तो देख लगानी ही क्यों है?" मैंने पूछा, "ये आपको शाम को पता चलेगा" वे बोले, और मुस्कुरा गए! मेरे अंदर...
"आपका मतलब, अब कहानी उनकी अपनी होगी?" मैंने पूछा, "नहीं, उनकी कहानी अब उनकी होगी!" वो बोले, बहुत गहरी बात कही थी उन्होंने! सम्भव था! ऐसा सम्भव था! अब ...
पहंचे?" मैंने पूछा, "हाँ, पहुंचे" वे बोले, "वे मिले?" मैंने पूछा, "हाँ, मिले" वो बोले, "फिर क्या हुआ?" मैंने पूछा, "जिस समय वे पहुंचे, मंगल वहाँ नहीं ...
