श्रीशः उपदंडक
श्रीशः उपदंडक
@1008
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RE: वर्ष २०१० जिला मथुरा की एक घटना

सब फेल हो गए जी” वे बोले, तभी खाना आ गया! पूरियां, अचार, दही और सब्जी! साथ में प्याज और टमाटर कटे हुए! “खाना खाओ जी” वे बोले, अब खाना खाने ल...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० जिला मथुरा की एक घटना

“और गड्ढे?” मैंने पूछा, “अपने आप” वे बोले, “अपने आप बंद भी हो जाते हैं?” मैंने पूछा, “हाँ जी” वे बोले, हैरत की बात थी! बहुत हैरत की! ऐसा क...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० जिला मथुरा की एक घटना

औरतें कैसी थीं?” मैंने पूछा, “देहाती ही थीं जी” वे बोले, “क्या पहना था उन्होंने?” “धोती थी जी” वे बोले, “किस रंग की?” मैंने पूछा, पीले रंग क...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० जिला मथुरा की एक घटना

और फिर हमारे साथ बैठ चले गाँव की तरफ! उनके घर पहुंचे! और उन्होंने गाड़ी लगवायी हमारी, गाड़ी हमने उनके घेर में ही लगा दी, पेड़ों के नीचे, कट्ठे के पेड़ थे ...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० जिला मथुरा की एक घटना

“पिंडियां आदि?” मैंने पूछा, “नहीं जी” वे बोले, “कोई चबूतरा वगैरह?” मैंने पूछा, “नहीं गुरु जी” वे बोले, कुछ भी नहीं ऐसा! तो फिर क्या हो सकता ...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० जिला मथुरा की एक घटना

“क्या हुआ था?” मैंने पूछा, “अगले ही दिन खेत में फिर से टीले बन गए” वे बोले, “अच्छा!” मैंने कहा, “हाँ जी” वे बोले, “फिर?” मैंने कहा, “तब से ऐ...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० जिला मथुरा की एक घटना

“मैं गया था गाँव कोई तीन महीने पहले, भाई ने बताया तो मुझे ये वहम लगा, लेकिन फिर उन्होंने बताया कि मैं खुद देख लूँ, वहाँ ठहरूं और पता चले” वे बोले, “...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

मित्रगण! इथि इस पृथ्वी पर बस इसी क्षण तक के लिए थी! कहाँ गयी, कुछ नहीं पता! विपुल कहाँ गया, कुछ नहीं पता! ये थी इथि और विपुल की प्रेम-गाथा! ...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

शक्तिशाली! अद्वित्य! सौन्दर्यवान! इथि ने उसको देखा और भाग छूटी! चिपक गयी विपुल से! विपुल ने उसको भुजाओं में जकड़ लिया! हार गया गान्धर्व कुम...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

लेकिन नहीं! इथि जस की तस! जब और ज़बरदस्ती हुई तो घूंघट हट गया इथि का! आंसुओं ने कोहराम मचा दिया था चेहरे पर! कजरा आभूषणों तक बह चला था! लेकिन...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

तब पल्ली और कुछ विशेष परिजन लाये इथि को वहाँ! बिठा दिया! बैठ गयी! अब कर्म आरम्भ हुआ! और जब पंडित जी ने हाथ माँगा इथि से…………….. तो उसने हाथ न...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

अंदर कक्ष में! क्या खूब सजी-धजी थी आज इथि! रूप खिल के उभरा था! साक्षात अप्सरा सी लग रही थी इथि! देव भी सूक्ष्म शरीर में आकर निहार गये हों तो क...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

कुछ न कुछ तो होगा ही उसके ह्रदय में! उस समय! और सखियाँ आ गयी! हंसी ठिठोली आरम्भ हुई! कक्ष से हंसने और सौहार्द के स्वर फूट रहे थे! सबकुछ ठीक ...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

जैसे मैंने सबकुछ देखा अपनी आँखों से! वही लिखा मैंने यहाँ! खैर, रात बीती! मुर्गों ने बांग दी! सुबह आ पहुंची थी! आज सुबह से ही घर में रौ...

1 year ago
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