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वे चले गए, “कब निकलना है?” शर्मा जी ने पूछा, “खाना खा लें, हल्का-फुल्का, फिर चलते हैं” मैंने कहा, “ठीक है” वे बोले, फिर हुई शाम! रात दूर खड़ी...
कोई चिन्ह आदि ही मिल जाए? कुछ नहीं! कुछ नहीं मिला! मैंने बजायी! मीठी सी आवाज़! अचानक से मुझे कुछ ध्यान आया! मैंने सुना था, ये ध्वनि-नियंत्र...
“चीखा कैसे! जैसे गोली मार दी हो!” वे बोले, “वो मंत्र गोली ही है!” मैंने कहा, “अच्छा!” वे बोले, “हाँ, अशरीरी पर ऐसा ही आघात करता है वो मंत्र!” मै...
अब मैंने अपना बड़ा बैग तैयार किया! सामान तैयार किया! सामग्री आदि की जांच की! और फिर एक कागज़ पर सामान लिखा, ये लाना था, ज़रूरी था! कागज़ शर्मा जी ...
उन दोनों का! मैंने हिम्मत बंधाई उनकी! ताक़ीद की कि अब कोई कैला नहीं आये यहाँ! और आज रात हम, मैं और शर्मा जी, यहीं इसी कोठरे में रहने वाले थे! भ...
सुरीली सी आवाज़! “ये उसकी की होगी! गिर गयी होगी!” मैंने कहा, “हाँ” वे बोले, अब सब शांत था वहाँ! कुछ नहीं हुआ था! मैंने वो घंटी रख ली अपने बैग...
खौफनाक! पल में कुछ भी हो सकता था! कुछ भी! फिर से मैंने मिट्टी उठायी! फिर से महा-अभिमन्त्रण! और फिर से फेंका सामने! अब सब शांत! कोई नहीं ...
यही लगा! मैंने देखा सामने! कोई तो था, लेकिन स्पष्ट नज़र नहीं आ रहा था! और तभी जैसे उसी ने कुछ फेंका हम पर! ये जल था! हमारे ऊपर गिरा! अभिम...
“कौन है?” मैंने कहा, कोई उत्तर नहीं! तभी एक वायु का झोंका आया! तेज, गरम वायु! चिलचिलाती गरम! जैसे हम किसी जलती भट्टी के पास खड़े हों! ये मन...
चेतावनी? धमकी? बल-प्रदर्शन? क्या था ये? मैंने मिट्टी की एक चुटकी ली और फिर हाथ के मध्य में रखी! अभिमन्त्रण किया थूक का, और हाथ में थूक दिय...
“कोई सिद्ध!” मैंने कहा, “ओह…………” वे बोले, “हाँ, कोई सिद्ध!” मैंने कहा, “ये तो…….भयानक बात है” वे बोले, “हाँ, है तो” मैंने कहा, “ये सात्विक स...
हाथ बहुत तेज लगा था वैसे तो! आवाज़ बड़ी तेज आयी थी! तभी चौंक पड़े थे हम! “आओ” मैंने कहा, हम बढ़े केले के पेड़ों की तरफ! एक जगह पानी पड़ा था, और कह...
“चलिए” वे बोले, अब हम चल दिए! हम वहाँ पहुंचे! मंत्र-जाप बंद हुआ! ये एक साधिका थी! कोई बीस-बाइस बरस की! सर ढांपे! धोती पहने! हम और आगे ...
हम खड़े हुए और चल पड़े! टहलते टहलते पहुँच गए! दिनेश जी वहीँ था! नमस्कार हुई! और हम कोठरे में बैठे! वे दोनों भी वहीँ थे! “आप दोनों यहीं रहना,...
“चल जायेगी” मैंने कहा, फिर चाय भी आ गयी! चाय पी! और हम लेटे अब! फिर से वही प्रश्न! वहीँ उलझे! “कल ही पता चलेगा, सर खुजलाने स एकोई फायदा नह...
