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हम! मैं बैठा, सोरन बैठा और सोरन ने एक महिला को बुलाया और मंगवाया पानी, सच में, उस समय तो पानी की ही ज़रूरत थी! हलक में कांटे उग आये थे, थूक न निगलत...
और तभी एक सहायक आया, नमस्कार की उसने, और पानी रख दिया, दरवाज़ा खुला था, इसीलिए आया था अंदर, और शायद मेरी आवाज़ भी सुन ली थी उसने, नहीं तो दस्तक देकर आ...
चले ही जाने थे! और अब जाते समय, बाबा आदि नाथ से भी मिले और विदा ली! हम बाहर आये, और सवारियां तय की, एक में मैं, शर्मा जी और वो सुश्री और एक में अन्य स...
पहले ही, हम फारिग हो लिए थे! "अब बुखार तो नहीं?" पूछा मैंने, "नहीं, अब ठीक हूँ' बोले वो, चाय-नाश्ता आ गया था, फिर हमने नाश्ता किया, और मैं उठकर, चला ज...
बाज नहीं आते! हम पहुँच गए वहाँ! बैठने का कोई स्थान शेष नहीं था, भीड़ बहुत थी, ब्रह्म-दीप प्रज्ज्वलित किया जा चुका था और अब आरती चल रही थी। मैंने सुश्र...
उसने! "कुछ नहीं सुश्री!" कहा मैंने, "डर लग रहा है न?" बोली मुस्कुरा कर! "हाँ, लग रहा है!" कहा मैंने, "तो लगने दो आज!" बोली वो, और लेट गयी! ओफ्फ्फ्फ...
रहोगी मेरे?" बोला मैं, "हाँ, नहीं रखोगे?" बोली, "इतना तेज क्यों भागती हो तुम?" कहा मैंने, "हाँ या न बोलो?" बोली वो, "अरे हाँ! हाँ जी हाँ!" कहा मैंने, ...
और तभी मैंने उसका हाथ पकड़ा, मुझे देखती रही वो! "सुनो?" बोला मैं, "बोलो?" बोली वो, "चलें?" कहा मैंने, "कहाँ?" बोली वो, "जहां मैं ले जाऊं?" कहा मैंने, ...
हाथ बंद जाए, तो उच्च-विचार वाला, कुशलवक्ता, सामाजिक और आदर प्राप्त करने वाला होता है, हाथ खोल कर चले, और उंगलियां अंदर की तरफ हों, तो जीवन में संघर्ष ...
चौड़ी होगी, मांसल होगी, भारी होगी, वो अच्छे स्वास्थ्य की पहचान है! ऐसा जातक मज़बूत कद-काठी वाला, अपनी बात को रखने वाला, शब्दों को ही स्वर्ण समझने वाला...
होगी?" कहा मैंने, "वो क्यों?" पूछा उसने, "अब दिमाग में गुस्से की गर्मी भी तो है?" कहा मैंने, हंसकर! "हाँ, सही कहा!" बोली, नखरा दिखा कर। आँखें घुमात...
ज़िद्दी स्वभाव की होती हैं। अब स्तनाग्र का घेरा, यदि घेरा पूर्ण स्तन का एक बटे दस हो, तो भाग्यशाली, संतान सुख प्रदान करने वाली, ईमानदार और सम्मान प्रा...
और बता दिया कि कहाँ मिले थे! और तभी के तभी सुश्री आ गयी, प्लेट में कुछ लेकर! "क्या ले आयीं?" पूछा मैंने, "कपड़ा उठाओ?" बोली वो, मैंने उठाया, तो सलाद थ...
और मैं चला बाहर, गया सहायक के पास, और कह दिया सामान लाने के लिए, और आया वापिस, "अब नहीं खाना गोली" बोला मैं, "क्यों?" बोले वो, "अब मदिरा नहीं लेनी ...
का पोर हो ऊपर वाला, तो स्त्री लक्ष्मी स्वरुप होती है! यदि पोर, अंगूठे की तरफ झुका हो, तो राजसिक प्रवृति वाली होती है, सज धज के रहना, श्रृंगार में लिप्...
