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और आँखों से पानी! कुछ ही घंटों में, कैसे अपनापन बना लिया था मेरे संग उसने! सच कहूँ, तो मुझे भी ऐसा ही लगा था! आंसू पोंछे उसके! काजल बह चला था, साफ़...
तब तक मैं स्नान कर चुका था, शर्मा जी, चाय-नाश्ता लेने गए थे! "आ गयी नींद?" पूछा मैंने, एक ज़बरदस्त अंगड़ाई ली उसने! खजुराहो की मूर्ति समान! और तकिय...
और असल में? कितने तुच्छे हैं हम और हमारे विचार! क्या क्या सहा होगा इस चारु ने भी! मैं देख ही रहा था, की धीरे से चादर उठायी उसने, चेहरा निकाला बाहर, और...
गयी, उसके लिए भी, तो मना कर दिया मैंने उसको, "मैं पी लेती हूँ" बोली वो, "आज नहीं" कहा मैंने, "जैसा आप कहें" बोली वो, और तब बाबा काली आ गए, और आते ह...
वे बाहर गए, तो दरवाज़े पर, वो हरामजादा आ खड़ा हुआ, मैं उठा और चल उसकी तरफ, शर्मा जी भी चल दिए! - "तुझे इसका मोल चुकाना होगा!" कहा मैंने, "जब चाह...
ही शिष्य रहा हूँ! यदि क्रोध में आये वो, तो तेरा वो हाल होगा, कि तू अपने जन्म को कोसेगा!" बोले बाबा काली! "अच्छा?" बोला वो, "हाँ!" कहा उन्होंने, "बुलाओ...
और मेरे लिया जगह न थी बैठने की, एक कुर्सी मंगाई गयी, मैंने बिठाया शर्मा जी को उस पर, मना करने लगे, लेकिन मैंने बिठा ही दिया उन्हें! बाबा काली और बाबा ...
और उसी शाम, खाना-पीना कर, हम आ गए वापिस! एक दिन बीता, अगला दिन आया, और उस दिन, हम कोई शाम सात बजे, पहुँच गए उनके स्थान! वहाँ उनसे मिले, और अन्यों स...
और हम, करीब दो बजे, निकल आये वहां से, और जा पहुंचे अपने यहां, बाबा को सब बता दिया था, वे भी खुश हुए बहुत! मित्रगण! हम दो दिन और ठहरे वहां, और फि...
बोले वो, "जान नहीं जायेगी उसकी, हाँ, अब किसी क्रिया लायक शेष नहीं" कहा मैंने, "यही तो" बोले वो, "बदल क्या लिया था?" पूछा मैंने, "अब क्या बताऊँ?" बोले ...
और उसके घुटनों के पीछे की तरफ, एक नस को ढूँढा, मिली, लेकिन धड़कन नहीं थी उसमे! अब तो निश्चित ही हो गया! "उठ जाओ" कहा मैंने, वो हुई सीधी, और उठ गयी,...
नमस्कार हुई और बिठाया! अब मैंने अपने आने का प्रयोजन बताया उन्हें, और ये भी कि किसने भेजा है, वो दूसरे वाले बाबा उठे, चल दिए प्रणाम कर उन्हें, अब रह गए...
और सब, चारों ओर बैठ गए! मंत्र ध्वनियां गूंज उठीं! चिता में सामग्रियाँ आदि डाली जाने लगीं! करीब आधे घंटे के बाद, बाबा खड़े हुए, त्रिशूल साधा अपना, औ...
प्रार्थना की, कि अब वो जहां भी जन्म ले,कभी इसकी याद भी न रहे! मैं आया बाबा खंज की खताल, बाबा यहां सेम नौ कोस दूर चले गए थे, मैं वहीं गया, वो ध्यानम...
