श्रीशः उपदंडक
श्रीशः उपदंडक
@1008
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

“हाँ! भयानक आवाज़!” वे बोले, “आगे?” मैंने पूछा, “फिर शाम का सा धुंधलका छाने लगा, बदली छा गयी थीं आकाश में, बाबा ने आकाश को देखा, और फिर बिन्ना से क...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

गुस्से में फुफकारता रहा, उसने आसपास की झाड़ियों में भी हलचल कर दी, छोटे-मोटे पत्थर ऊपर से नीचे खिसकने लगे, धूलम-धाल हो गया वहाँ! सांप किसी भी तरह से बा...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

“अरे! बड़ा खतरनाक सांप रहा होगा वो!” मैंने कहा, “बहुत खतरनाक!” वे बोले, “फिर बाबा?” मैंने पूछा, “बताता हूँ” वे बोले, और बाहर चले गये, शायद तम...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

बाबा को पानी दिया, उन्होंने पानी पिया! मैंने कुछ पल इंतज़ार किया! “फिर बाबा?” मैंने पूछा, “अब बाबा ने मंत्र चलाया! और उन साँपों पर थूक दिया!” व...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

तभी बाबा ने पानी माँगा, शर्मा जी पानी लेने गए, पानी ले आये, बाबा को दिया, उन्होंने पिया और मुंह पोंछा, बाकी पानी मैंने पी लिया! “फिर?” मैं...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

“और फिर वहाँ जैसे अँधेरा छा गया!” वे दोनों हाथों से बताते हुए बोले, “अँधेरा?” मैंने पूछा, “हाँ अँधेरा!” वो बोले, “कैसा अँधेरा?” मैंने पूछा, ”ए...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

“ओह!” मैंने कहा, “फिर बाबा ने हमको आवाज़ दी, हमको बुलाया, हम डरते डरते नीचे उतरने लगे! हमने बिन्ना को दो बार मौत को गले लगाते देखा था, कहीं ऐसा दुबार...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

वे आ गए अंदर! “चलें?” उन्होंने पूछा, “अभी?’ मैंने पूछा, “हाँ?” उन्होंने कहा, “अभी रुकिए ज़रा” मैंने कहा, “क्या बात है?” उन्होंने पूछा, “बाब...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

“और फिर उसी गड्ढे में से कई सांप निकले! चमकीले, चांदी जैसे सांप! भयानक रूप उनका! मोटे मोटे!” वे बोले, “रक्षपेक्षक!” मैंने कहा, उनको समझ नहीं आया म...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

“थोड़ी देर सभी ने झपकी ली, वहाँ गोह ऐसे भाग रही थीं जैसे कुत्ते भागते हैं, हमे देख रुक जाती थीं, लेकिन सुरक्षा घेरे के कारण कोई अंदर नहीं आ सकी!” वे बो...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

“ओह” मैंने कहा, “फिर बाबा वहीँ बैठ गए, अपना त्रिशूल वहीँ रेत में गाड़ दिया, और बिन्ना को भी वहीँ बिठा लिया, बिन्ना भी वहीँ बैठ गया!” वे बोले, ”अच्छ...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

अपने मुंह से फ़ालतू लगा तम्बाकू उन्होंने बहार जाकर थूक दिया, और फिर आ बैठे! “फिर बाबा?” मैंने पूछा, “वो सांप वहीँ गड्ढे के पास जाकर बैठ गया, कुंड...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

“पता नहीं, क्या था वो, कंकड़-पत्थर से थे वो सब” वे बोले, कंकड़-पत्थर? वो किसलिए? शायद कुछ और होगा, दूर से दिखा नहीं होगा! नहीं दिख पाया होगा! “अ...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

“हाँ! दोनों!” वे बोले, मुझे बड़ी बेसब्री हुई! आगे क्या हुआ? बार बार मैं पूछता रहा! और सच में, मैं भी वहीँ उस दृश्य में खो गया था! “वे दोनों गड्...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९ पुष्कर के पास की एक घटना

“वहाँ जाकर अब बाबा ने जैसे उस जोड़े से बात की, जैसे उस जोड़े ने सारी बात सुनी उनकी! और फिर नागिन ने फुंकार मारी! अस्वीकारोक्ति!” वे बोले, “बिलकुल!” मै...

2 years ago
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