Last seen: Apr 23, 2026
“मान जाइये” उसने इल्तज़ा की! “नहीं” मैं अडिग! “ठीक है!” वे बोलीं और गायब हुईं! अँधेरा हो गया कमरे में! वापिस जैसे धरती पर आ गया मैं! वे च...
मैं चुप! ऐसा चोर जो छोड़े भी नहीं और चोर भे कहलाये! खैर! “नहीं” मैंने कहा, मैंने कहा और वहाँ और भी आ गयीं खूबसूरत क़रीन औरतें! “ये सब भी” वे ब...
कुछ नहीं! आप भला क्या दोगे, आपके बस में है ही क्या?” वे हंस के बोलीं, “बजह फरमाया आपने, मेरे बस में कुछ नहीं” मैंने कहा, मैंने बात काटी उनकी, मैं ...
कुछ देर और! और फिर! शहज़ाद आया वहाँ! “सुनो ओ आलिम” वो बोला, “कहो शहज़ाद” मैंने कहा, “दो बातें, मैं इसको छोडूंगा नहीं और दूसरा फ़ना होने का डर न...
गालियां खायीं बहुत! खानी पड़ीं! एक इंसानी लड़की को कैसे सौंप दूँ में उस शहज़ाद जिन्न को! वो अपने में ही रहे, उल्लंघन उसने किया क़ायदे का, मैंने नहीं, ...
“मान लिया, लेकिन आपकी वो आदमजात ने खुद क़ुबूल किया है अब आप क्या कहेंगे?” इदरीस ने कहा, “किया नहीं, करवाया गया है” मैंने कहा, “ये कैसे मुमकिन है?” ...
“शहज़ाद, तेरा हमज़ाद भाग गया! तू अभी भी नहीं समझा?” मैंने चेताया, अब शहज़ाद न सुला दिया नेहा को, धीरे से बिस्तर पर रकह, और बोला, “इनको कौन भगाएगा? शह...
सब बेकार! हमज़ाद को एक फायदा हमेशा मिलता है! जहां छलावा सूरज की रौशनी पड़ते ही गायब हो जाता है वहाँ हमज़ाद डटा रहता है, और यहै इंसान उस से मार खा ज...
हम कमरे में आये, मैंने सभी को बाहर किया, शर्मा जी को भी! और तभी! तभी नेहा ने कहा, “हमज़ाद, आओ” कमरे में रखी हर चीज़ गिर गयी! और! “कौन है तू?” ...
नीचे लगे स्टेबलाइजर में लगी आग! पटाखा छूटा! मतलब? हमज़ाद पास में ही था! शर्मा जी ने अपने फ़ोन की लाइट जला ली थी! अब मैं आपको हमज़ाद के बारे में ब...
वो नहीं सुन रही थी! अचानक! अचानक! वो चुप! मुझे घूरते हुए उठी! मैंने सभी को पीछे किया, “तू क़त्ल होगा अब” उसने मुझे बंधे हाथों से इशारा करके...
अब हम पहुंचे नेहा के कमरे में! वो औंधी हुए सोयी पड़ी थी! “जगाओ इसे” मैंने कहा, किसी तरह से जगाया गया उसको! उसने हमको देखा तो फिर से बुक्का फाड़ ...
“चिंता न कीजिये, मैं भी टकरा रहा हूँ उनसे”, मैंने कहा, “कुछ चाहिए तो हुकम कीजिये” वे बोले, “फिलहाल में कुछ नहीं” मैंने कहा, “एक बात बताइये, छह म...
भाग गया शहज़ाद! कुछ देर हुई, कोई नहीं आया, मैं एक कुर्सी पर बैठ गया और हाथ से एक कागज़ में आमद-बंद के रुक्के लिखने लगा, लिखने के बाद मैंने उस कमरे म...
“दुर्रफ़ काम नहीं आया तो घुटने टेक दो” उसने कहा, इतनी बेबाकी? गुमान? “ज़ुबान सम्भाल ओ आतिश!” मैंने गुस्से से कहा, “आपका ही उत्तर दिया मैंने!” उसने...
