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हलक में अटक गयी ज़ुबान! गला सूख गया! फिर से त्रिशूल लहराया! सामने किया, कल्पाज्ञी-विद्या जागृत की! अभिमन्त्रण किया! त्रिशूल पर हाथ फेरा! ...
सामने किया! और अभिमन्त्रण किया उसका! त्रिशाला-विद्या का आह्वान किया! और सम्मुख कर दिया! विद्या टकरायी! लेकिन! लेकिन वे अडिग रहे! कुछ नही...
मुझसे बड़ा मूर्ख और कौन! सच में! “नहीं जाऊँगा!” मैंने कहा, “प्राण गंवाना चाहते हो?” उसने पूछा, “हाँ!” मैंने कहा, वो आगे आये! कमंडल में हाथ ...
“वारुणी-पान नहीं करोगे?” उसने पूछा, “नहीं” मैंने कहा, फिर हंसी! बस! अब बस! मैंने त्रिशूल, उठाया! वो हंसी! और लोप हुई! भक्क! मैं बै...
नहीं आती अमिय किसी के पास! स्वतः तो कभी नहीं! मैं चुप! “अभ्यागत हूँ आपकी! मैं! सुखनिता!” वो बोली, ओह! ये कैसा लालच! कैसा घोर प्रपंच! “आग...
उसने फिर से देखा! मैंने भी देखा! “नहीं अमिय!” मैंने कहा, वो हंसी! घूमी! और वहाँ और भी अमिय प्रकट हो गयी! वैसी की वैसी ही! सभी हंसी! “न...
मैं चुप! फिर से रदच्छद फैले उसके!(रदच्छद मायने होंठ) मैंने देखे! शतपत्र से ओष्ठ उसके! कमल की पंखुड़ी सी आँखें! “सरसपान करोगे?” उसने पूछा, ओ...
“कौन हो तुम?” मैंने पूछा, “आओ!” उसने कहा, मैं नहीं गया! “कौन हो तुम?” मैंने कहा, गंध! गंध आयी! एक अतिमादक गंध! “मैं?” उसने कहा, “हाँ” ...
मैं देखता रह गया! कौन है ये? कोई माया? या अन्य कोई? कौन है? वो मेरे सामने आयी! उसके उन्नत वक्ष-स्थल पर मेरी नज़र गड़ गयीं! चौड़े कंधे! पत...
आ रहे हैं! यही बताया था उसने! धन्यवाद मंजरी! बहुत बहुत धन्यवाद! आंजनेय उच्च-कोटि के प्रबल मांत्रिक थे! ये मैं जानता था! मैं तो भिड़ा हुआ था...
फिर से लोप! मैं भागा आगे! “आओ?” मैं चिल्लाया! तभी कोई आया! मैंने त्रिशूल लहराया! और सामने देखा! मंजरी! मैं रुक गया! “मंजरी?” मैंने कहा...
सिद्धानी हंसी! मुझे देखा! “मूर्ख!” वो बोली, पीछे हटी! और लोप! मैं जड़ता से बाहर आया! “माया दिखाते हो?” मैं चिल्लाया! वो नौजवान साधू फिर स...
फिर से प्रकाश कौंधा! अब कौन? ये कौन? यक्षिणी? या आसुरिक माया? या साक्षात् मेनका? कौन है ये? कांच के सामान देह उसकी! ऐसे सुडौल वक्ष नही...
लाभ! कैसा लाभ! “नहीं” मैंने मना किया! प्रकाश कौंधा! एक नग्न स्त्री! प्रकट हुई! ऐसा स्वरुप! ऐसा कि अप्सरा जैसा! नज़र टिके तो हटे ही नहीं...
जाग गया! जाग गया औघड़! नहीं! कभी नहीं! “जाओ सिद्धानी, जाओ!” मैंने कहा, वो हंसी! एक मूर्ख था मैं उसके लिए! मूर्ख! हाँ मूर्ख ही तो था मैं...
