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अब पानी पड़ा बरतन में तो, कौवा छिटक कर, पास में ही खड़ा हो गया, जब सहायक हटा, तो अपनी चोंच में, पानी भर कर! सर ऊपर कर, पानी पीने लगा! ...
दुम हिलाते हुए, चटकारते हुए, पानी पी लिया उसने! फिर मुझे देखा, मूक भाषा में, मेरा धन्यवाद किया, तभी दूसरा श्वान भौंका, तो वो भी भ...
पंखे की आती आवाज़, और उसमे होती, खट खट, जैसे और हमारी हालत के ताबूत में, कीलें ठोकी जा रही थी! तभी मेरे कमरे में, मेरा एक श्वान आया, दुम...
सब सही हो गया! श्रुति का रूप-रंग निखार गया! दाम्पत्य जीवन सुखी हो गया, उसको मातृत्व सुख भी मिलने वाला है! अब सब सही है! मुझे ये घटना आज...
वो राख सब गायब हुई! मैं पहले जैसा हुआ! नवजीवन सा संचार हुआ! "साधक! मैं जा रहा हूँ!" वो बोला, मैंने देखा, और अपना त्रिशूल गाड़ दिया नीचे!...
पेड़ों पर असमय फल उगवाता! अपना आसन बिछवाता! नहीं! नहीं! "हे ब्रह्म-पिशाच! प्रणाम!" मैंने सर झुकाते हुए कहा! वो मुस्कुराया! हंसा! म...
महा-षंड विद्या ने कर दिखाया, असम्भव को सम्भव! मैं आगे बढ़ा! वो खड़ा था! भूमि पर! अशक्त! लाचार! क्रोध गायब! मद समाप्त! अब एक प...
सांप फुफकार रहा था! और अगले ही पल! अगले ही पल! नेवला आज़ाद था! नेवले की तरह तड़प रही थी महा-शंड विद्या उस ब्रह्म-पिशाच का भक्षण करने को! ...
मैंने मदिरापान किया! और मांस का एक टुकड़ा उछाल फेंका सामने! मैंने टुकड़ा फेंका! और वहाँ कटे नर-मुंड गिरने लगे! एक के बाद एक! जैसे किसी वृ...
चुभने लगी! हाँ! अब अट्ठहास नहीं हो रहा था! मैंने अब उस ब्रह्म-पिशाच का मार्ग अवरुद्ध करने का कार्य किया! भूमि पर, त्रिशूल से तीन त्रिभु...
सर्प! बहुत फुंकारा था! त्रिशक्त-मंत्रों में मैं लिपटा, नृत्य कर रहा था! डमरू बजाता! त्रिशूल लहराता! जटाएँ हिलाता! और अलख के चारों...
माथे को पुष्ट किया! त्रिशूल को नमन किया! और अब जाप आरम्भ किया! जैसे ही जाप के स्वर गूंजे! वो चौंका! जैसे सिट्टी-पिट्टी गुम हुई हो! य...
और वो वार किया! भूमि थिरक सी गयी! पेड़ हिल गया! मेढ़ा रेंक पड़ा! एक ही स्वर में! मैंने त्रिशूल आगे किया! और झेला उस वार को! मैं खड़ा ...
त्रिशूल को अग्नि से छुआ! और कर दी नोंक सामने! विद्या अग्नि वर्षा की तरह से उड़ चली! और वो छिटका! पीछे! उछलता, कूदता! अट्ठहास करता!...
