श्रीशः उपदंडक
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@1008
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RE: वर्ष २०११ मिर्ज़ापुर की एक घटना

अब वो उठी और पूर्णतः निर्वस्त्र हो गयी! मेरी आँखें चुंधिया सी गयी उसका गौर वर्ण देख कर! "मैं अभी भी कच्ची हूँ!" उसने कहा, और यहाँ मैं पक कर बस ग...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ मिर्ज़ापुर की एक घटना

या अपने खड्डे में खुद गिरा! "नहीं" मैंने उत्तर दिया, 'एक बार?" उसने अब मेरा हाह खेंच के अपने सीने पर रख लिया, मुझे उसकी कम और अपनी धड़कनों की आवाज ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ मिर्ज़ापुर की एक घटना

समझ गया! बहुत गहरी बात! सब समझ गया! सिद्धि-रात्रि! सब समझ आ गया! और आ गया अब मुझे में अहम्! आना भी था! "तो मैं आपका काम-पुरुष ठहरा, ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ मिर्ज़ापुर की एक घटना

छठा पैग! गटक लिया! चीरता हुआ गया सीने को ये वाला तो! "आज रात्रि मेरे साथ ही रहना पड़ेगा!" उसने शरारती अंदाज़ में कहा! मर गया! अब क्या होगा? ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ मिर्ज़ापुर की एक घटना

"हाँ" बोलने से पहले परिस्थिति का जायज़ा अवश्य लिया! "आइये, शुरू होते हैं" शर्मा जी ने भी चुटकी ली, अभी एक पैग घाला ही था कि और मुसीबत आ गयी! वही ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ मिर्ज़ापुर की एक घटना

"पर्णी?" मैंने कहा, "हाँ?" उसने उत्तर दिया, "हटो?" मैंने कहा, उसने गर्दन हिला कर मना कर दिया! "पर्णी, मुझे जाना है" मैंने कहा, उसने फिर से ग...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ मिर्ज़ापुर की एक घटना

नहीं! ये मैं क्या सोचने लग गया! मदिरा दोष! हाँ, वही! मदिरा दोष! क्या ये मदिरा है पर्णी?" मैंने दोषारोपण किया! और क्या करता! "नहीं" उसने ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ मिर्ज़ापुर की एक घटना

रक्त भर आया था उनमे! उसका कसा हुआ ब्लाउज़ साध नहीं पा रहा था उसके स्तनों को! मैं दूर, दूर ही सुलग रहा था, खड़ा खड़ा! मैं संयत हुआ! होना ही था! ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ मिर्ज़ापुर की एक घटना

अग्नि तो शिखर पर है! मैं उठ खड़ा हुआ! उसकी पकड़ से छूटा! आह! ताज़ा हवा! क़ैद से मुक्ति! "क्या हुआ?" उसने पूछा, "कुछ नहीं" मैंने झूठ कहा फिर!...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ मिर्ज़ापुर की एक घटना

और मेरी आँखें चौड़ी हुईं! वो काम-शान्ति अवस्था में गयी और मैं कामविह्वल हुआ! वो शांत उर मुझ में तूफ़ान! यही होता है न? स्त्री समर्पण करती है और ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ मिर्ज़ापुर की एक घटना

अरे वाह रे औघड़! घिर गया! गिर गया! लेकिन मैं संभला! पैग ख़तम किया, "मुझे छुओ" उसने कहा, "छुओ?" मैंने प्रश्न किया. स्व्यं से! कैसे? किस...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ मिर्ज़ापुर की एक घटना

मन में कहीं उसकी मर्दानगी चोरी कराती रहती है! ऐसे ही मेरा चोर! वो और आ गयी मेरे करीब! मुझसे उसका चेहरा कुछ इंच ही दूर! "कुछ समझे?" उसने कहा, ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ मिर्ज़ापुर की एक घटना

आप क्या कहते मित्र बताओ? कोई क्या कहता? क्या कहते आप? ऐसे चुप न रहो? बताओ? उठ जाते? मैंने भी यही सोचा! उस समय! मैं उठ गया! मेरे हाथ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ मिर्ज़ापुर की एक घटना

मैंने उत्तर दिया और वो मेरे ऊपर पुश्त करके लेटी! अब मै क्या कहूं! जानबूझकर या फिर असर-ए शराब?" एक पल को मै भी भौंचक्का! "मैं भी भड़की हुई हूँ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ मिर्ज़ापुर की एक घटना

उसने अपनी धोती ऊपर की, पाँव से, उसकी मांसल पिंडली देख के मेरी हूक उठी, मैंने गालियां देकर बिठाया उसे, उसकी सुडौल पिंडलियाँ ऐसी जैसे नारियल के वृक्ष की...

2 years ago
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