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"चंद लम्हों में मेरे मालिक यहाँ पहुँचने वाले हैं!" हसन ने कहा, "अच्छा!" मैंने उत्सुकता से कहा! उसने एक छोटा सा झोला निकाला, उसमे से मीठी खील और बत...
आज वहाँ कालीन सा बिछा था! ये शायद जिन्नात ने डाला होगा, वे ही होते हैं कालीनों के शौक़ीन! पीर बाबाओं के ये जिन्नात मुरीद हो जाया करते हैं, उनकी नेकदिली...
और जैसे ही हम आगे बढ़े, वहाँ टीले से एक दूधिया सा प्रकाश फूटा! चकाचौंध कर देने वाला प्रकाश! आँखें अपनी रौशनी खो ही बैठतीं अगर अमल से जड़ी न गयी होती तो!...
साफ़-सफाई हो गयी! हम हट गए वहाँ से! चाय-नाश्ता लग चुका था सो चाय-नाश्ता किया! उसके बाद, दोपहर हुई! खाना खाया, और चले बाज़ार हम! बाज़ार पहुंचे, वह...
"आप कुछ भी कहें!" वे बोले, "चलो मानी!" मैंने बात ही ख़तम की! तभी महेंद्र साहब आ गए! खाना लाये थे! हसन में तो हम ऐसे उलझे कि खाना भी खाना है ये भूल ...
"हाँ, अपने मुर्शिद के ख़ैरमक़दम के लिए!" मैंने कहा, "कैसा प्रेम है ये!" वे बोले, "निश्चल प्रेम!" मैंने कहा, "सही में" वे बोले, "कल मैं फिर चलूँग...
"हाँ, क्यों बताया जाए! समझ गया!" वे बोले, "शर्मा जी! ये दुनिया तमाशबीन है! यहाँ सब तमाशा देखते हैं, चाहे मेरे घर का हो या आपके घर का! इंसानियत का हा...
"हाँ, ज़रूर" मैंने कहा, उसने तब एक को आवाज़ दी, क़ासिम नाम लेकर, क़ासिम आ गया, लड़का सा था वो, अधिक आयु नहीं थी उसकी! क़ासिम ने हमको छक कर पानी पिला दिया!...
"वो सीधा यहीं आयेंगे!" वो बोला, "अच्छा!" मैंने कहा, "हाँ, यहीं आयेंगे, बरसों गुजर गए" वो बोला, "बरसों?" मैंने अचरज से पूछा, "हाँ, बरसों!" वो ब...
"आइये" एक ने कहा, मैंने उसको देखा! वो मुस्कुरा रहा था! लेकिन वहाँ हसन कहीं नहीं था! "आ जाइये सामने, ठीक सामने!" मुझे एक आवाज़ आयी! ये हसन की आव...
उसने कह दिया कि जब चाहो तब वो मजदूर और राज-मिस्त्री और दूसरा सामान भेज देगा! ये भी ठीक हुआ! अब तक सब सही निबटा रहा था! और मित्रगण, वो दिन भी हमने बे...
"हाँ, आपने बताया था" वे बोले, "हसन कुछ बतायेगा, मुझे लगता है" मैंने कहा, "अच्छा" वे बोले, "मैं बाबा को साक्षात देखना चाहता हूँ शर्मा जी!" मैंने ...
"हाँ, निःसंदेह ये सौभाग्य की बात है!" मैंने कहा, "महेंद्र साहब! आप क़िस्मत के धनी हो, जो बाबा का स्थान आपके घर में है! बाबा की चिरागी करना, कभी टूटने...
अब मैं उठा, वो भी उठा! "अब मैं चलूँगा!" मैंने कहा अनुभव क्र. ६७ भाग २ By Suhas Matondkar on Saturday, September 20, 2014 at 9:05pm "हाँ, ठीक...
मैंने खाना शुरू किया! मोटी मोटी खील और ताजा बने बताशे! ऐसा ही लगा! ताजा खांड का सा स्वाद और खुश्बू! "हसन?" मैंने कहा, "कुछ पूछना चाहते हैं?" उसने ...
