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नेत्रबिम्ब तो चलायमान थे नेत्रों की पलकों के भीतर! सो, ना उठ सकी देह इथि की! हाथ से हिलाकर उठाया माँ ने उसे! वो उठ बैठी! आँखों में नशा और बद...
पसीने तो आत्म-मंथन की निशानी है इस प्रसंग में! बसंत में पसीने! रात्रि का उत्तरार्ध आया और तब जाके कहीं दूर खड़ी निंद्रा ने छू लिया इथि को! सो गयी इ...
फिर वही! ये कैसी उलझन! अब तो उलझ गयी थी! निकलना भी तो नहीं चाह रही थी! यही तो थी उलझन! अपनी उलझन के बसेरे में ही तो बस रही थी वो उस क्षण! ...
अब मैं क्या करूँ हे चंद्रदेव! मुझे खुद नहीं पता! ज्ञात ही नहीं कि किस भंवर में डगरा रही हूँ मैं! ये क्या है? मुझे नहीं पता! सच में नहीं पत...
रात न कटे अब! करवटें और करवटें! बदन में एक नशा! मस्तिष्क में एक पृथक ही नशा! दोनों का संपर्क भी पृथक! ये क्या हुआ है? कौन बतायेगा? ये तो...
ऐसा ही तो हुआ! बहुत कुछ हुआ! "कुछ नहीं माँ" इथि ने कहा, अब माँ चली बाहर! अनाज फटकार लिया, एक थाल में रख दिया, और फिर से लेट गयी इथि! आज तो...
फिर से करवट बदली! और फिर से उलझन! क्या हो गया उसको! कैसे सारे बदन ने और मस्तिष्क ने काम करना बंद कर दिया? कैसे मैं आज मैं नहीं रही? क्या हो ...
और उलझ जाए! वो सुगंध! लगे वो सुगंध अभी भी साथ है उसके! यहीं तो है वो! वो परदेसी! तभी इथि की माँ कक्ष में आ गयी! माँ कक्ष में आयी तो अप...
सीधे अपने बिस्तर पर! फिर से वही उलझन! विपुल के नेत्रों की चमक! उसका मुझ-मंडल! उसकी सम्पुष्ट देह! सारा आंकलन कर लिया था इथि ने! अब बढ़ी बेचै...
कि और उलझा लिया उसने अपने आपको! आँखें अभी तक वहीँ टिकी थीं जहां वे गए थे! "चल इथि" एक ने कहा, "चल, देर हो गयी है" दूसरी बोली, "चल अब" तीसरी बो...
उलझन! उलझ गयी आँखें! कौन सी तेरी और कौन सी मेरी! पता नहीं! और फिर, पहली बार नज़रों की उलझन सुलझती नहीं, जितना सुलझाओ और उलझन पैदा हो जाती ह...
किस से पूछे! वो फिर से मुड़ी, तालाब तक आयी! वे स्नान कर चुके थे! उनके हास्य-व्यंग्य से प्रतीत होता था तालाब बहुत पसंद आया उन्हें! वे दोनों वस...
कौन? अचंभित सभी! वे दोनों उनके करीब से होते चले गए! सभी खुली आँखों से घूरते रहे उनको! उनके गुजरने के बाद वहाँ का वातावरण सुगन्धित हो गया! फूल ...
यही सोचा विपुल और सुचित ने! दोनों में मानस-रूप धरा! अब देखिये! एक यक्ष! या गांधर्व यदि मानस-रूप धरेगा तो उसका रंग-रूप, देह, कद-काठी, यौवन और वर्...
वो अपने अलौकिक-आभामंडल में था! उसके साथ एक और मित्र गान्धर्व था सुचित! वे दोनों ही वहाँ रुके! स्नान करने को लालायित! स्नान करा हो तो अलौकिक रू...
