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वे ठहरे व्यवसायी! उच्च घराने के व्यवसायी! तेरी क्या बिसात! तू है क्या? तेरा प्रेम क्या है इथि? मिथ्या-भ्रम! और कुछ नहीं! और तभी! नेत्र...
क्या करे? कह दे? स्पष्ट कर दे? बता दे? कहा दे कि विपुल मैं प्रेम पीड़ित हूँ! निकालो मुझे इस अगन से!'इस प्रदाह से! इस बंध से! मैं घुटती जा...
पहुंची अपने अपने घर! अब बात इथि की! इथि पहुंची अपने घर और हुई बिस्तर पर ढेर! विपुल! uska नाम विपुल है! कितना सुन्दर नाम! सार्थक होता नाम! ...
"जी, आपका भी" विपुल ने कहा, नमस्कार की और चल दिए अपनी डगर! बैठ गयीं दोनों! उठ ना सकीं! गान्धर्व-तेज से पीड़ित हो गयीं! और इथि? दोहरी मार लग...
इथि और विपुल की नज़रें दुबारा उलझ गयीं! "जी, पूछिए?" अब सुचित ने पूछा, "आप कौन हैं?" पल्ली ने पूछा, "व्यवसायी है, परदेस से आये हैं, यहाँ स्नान कर...
चलते गए! अब भागी पीछे पल्ली! "सुनिये?'' फिर बोली, अबकी रुके वे! वे दोनों! दोनों ने एक दूसरे को देखा! कौन रोक रहा है उनको? समझ नहीं पाये!...
और मार्ग के बेच में खड़ी थी पल्ली! वे आये और करीब! और करीब! और करीब! पास आ गए! पल्ली को बीच में देख ठिठक कर रुक गए! ना कुछ वे बोले और ना पल...
वे आये, उनके वार्तालाप का स्वर सुनायी दिया! "जा पल्ली" बोली इथि! उसने इथि की आँखों में देखा! सहज भोलापन! "जा?" इथि ने कहा, पल्ली चल पड़ी! उ...
हाँ! बाद में! कहीं कुछ...........?? नहीं! हो गया तय! बाद में! वे आये! और नज़रों के सामने से चले गए तालाब की ओर! उनको देख पल्ली हैरान! ...
लगन में यही होता है! यही तो है लगन! उलझन! अब उलझने वाला समझे! और फिर! दूर मार्ग पर आते दिखायी दिए तो अनजान परदेसी! अनजान?? नहीं नहीं! ...
श्वास ठंडी थी! नथुने गरम थे! कैसा भाव है ये इथि! और फिर हुआ मध्यान्ह समय! बदन भारी हुआ! मस्तिष्क सुसुप्त! परन्तु केंद्रित! पल्ली संग चल ...
चल पड़ी अनाज फटकारने! इथि! अपनी योजनाओं में लगी थी! हाय री उलझन! संध्या बितायी! रात्रि आयी! रात्रि बितायी! भोर हुई! वर्ष का सा समय लग ग...
समय तय हो गया! अब खुश इथि! दौड़ पड़ी घर की तरफ! धड़धड़ाते हुए घर में घुसी और सीधा बिस्तर पर! माँ फिर हैरान परेशान! अब जी में फूल खिलें! चलो, क...
बताती भी तो नहीं! इथि भागी अपनी सखी के पास! पल्ली! उसके बचपन की सखी! उसकी हमराज़! पल्ली के घर पहुंची! पता किया तो पता चला पल्ली छत पर! अन...
यहाँ क्यों आया है? कौन है वो? बस यही ख़याल घर कर गया दिल में! कि कौन है वो! अब पता कैसे किया जाये? कौन करे पता! अब किस से कहे व्यथा अपनी? ...
