श्रीशः उपदंडक
श्रीशः उपदंडक
@1008
Admin
Member
Joined: Apr 29, 2024
Last seen: Apr 20, 2026
Topics: 245 / Replies: 9254
Reply
RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

"अच्छा!" विपुल ने गर्दन हिला कर कहा! अब दोनों चुप! सुचित थोडा आगे निकल गया! "आपका गाँव समीप ही है?" विपुल ने पूछा, "हाँ, यहीं, समीप ही" वो बोल...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

प्रेम अगन! जी की लगन! उचक कर देखा! वे आ रहे थे! दोनों! इथि ने साहस बटोरा आज! संकोच त्यागने का प्रयास किया! वे आते चले गए! उन्होंने दूर...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

ऐसे ऐसे अनेक सवाल! होगा तो इथि स्व्यं बता ही देगी! चिंता कैसी! इथि पहुंची पल्ली के पास और नित्य की भंति तालाब पर पहुंची! निवृत हुई स्नान से और फ...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

सभी महत्वपूर्ण! कोई कैसे छोड़ा जाए! कभी इस करवट तो कभी उस करवट! कभी खुद के शब्द गूंजे, तो, कभी विपुल के शब्द! और वे अलौकिक पौधे! समझ ही ना ...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

मुस्कुरा गयी इथि! मुस्कुराना पड़ा! हाँ! पड़ा! ये भाव सह जाना इतना आसान नहीं! सीना गरम हो जाता है! आह ठंडी हो जाती है! यही तो हुआ इथि के साथ!...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

रिक्त सी इथि चली वापिस! घर पहुंची किसी तरह! माँ परेशान! पिता क्रोधित! "कहाँ से आ रही है?" माँ ने पूछा, "कहीं से नहीं" प्रेम झूठ बहुत बुलवाता ह...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

नहीं! नहीं! उचित नहीं ये! वे मार्ग से हट गयीं! वे दोनों गुजर गए आगे! और विपुल ने पीछे मुड़ कर देखा! इथि को! मर गयी इथि! इतना बोझ! इतन...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

सो प्रतीक्षा की! क्षण बहुत लम्बे हो चले थे! क्षण जैसे स्थिर हो गए हों! और फिर वे दोनों खड़ीं हुईं! बीच मार्ग में आयी! वे आ रहे थे! धमक धमक!...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

हेप! कौन हैं ये? देव? मायावी? कौन? यहाँ पुष्पों के पौधे कैसे आये रातों ही रात? इन्हे कैसे पता? ये तो सीधे आते हैं, चले जाते हैं, परदेसी ...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

वहाँ कोई पुष्प नहीं थे! इथि ने भी देखा, पल्ली ने भी देखा! कहीं दिखायी पड़ जाएँ! लेकिन कहीं नहीं! "आज तो कोई पुष्प एकत्रित नहीं किया आपने?" विपुल ने...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

एक माह? बस? फिर? फिर क्या होगा? ये चले जायेंगे? फिर? प्रश्न-चक्र घूमा इथि के मस्तिष्क में! अब दोनों सखिया चुप! चुप वे भी! "आप किसलिए...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

"नमस्कार!" दोनों ने हाथ जोड़कर कहा! हँसते हुए! कुम्हलाती हुई इथि को देखा विपुल ने! खुद को समेटे हुए थी खुद ही में! विपुल ने दोनों को देखा! अब नमस...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

और नहीं गयी! सखी भी नहीं गयी! वो भी वहीँ बैठ गयी! सखी वही! पल्ली! उचाट था मन इथि का! अब कैसे हो? कैसे बात बने? कैसे ज़ाहिर करे? बड़ी मुसीबत!...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

सोच में डूबी इथि! संध्या बीती! रात्रि आयी! विकट गुजरी! भोर हुई! आँखों में ही सबकुछ हो गया! प्रहर बदल गए! कोई आने वाला है! सुबह! कुछ ...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

प्रेम भड़क जाये तो हाल खराब ही होता है! अर्थात उचाट देता है दीन-दुनिया से! मैं मैं नहीं रहता और वो और वो हो जाया करता है! जी उचट जाता है! यही हुआ इथि क...

2 years ago
Page 205 / 634
error: Content is protected !!
Scroll to Top