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सार दिवस ऐसे ही काटा! संध्या हुई तो मैं क्रिया-स्थल गया, जीवेश ने समस्त प्रबंध करा दिया था! मैं क्रिया-स्थल में स्थान-पूजन और गुरु-नमन पश्चात अब अपना ...
में! उसको मालूम ही नहीं था उसके बारे में, अब इसके दो कारण थे, या तो हमारे पास नाम सही नहीं थे, और गलत आदमी की जांच हो रही थी, या फिर वो इतने प्रभाव वा...
"बुक्कन से पता चला जाए तो बात बन जाए!" बोला जीवेश, "हाँ,लेकिन ये बाबा वही हो तो है कोई बात" मैंने कहा, "हाँ ये तो सही कहा" वो बोला, खाने से फारि...
"कितने बजे तक?" मैंने पूछा, "छह बजे तक" उसने कहा, पांच घंटे थे छह बजने में! क्या करें? "वौसे आप कहाँ से आए हो?" उसने पूछा, अब सम्भाली कमान जीव...
"चलो, यहीं चलते हैं" मैंने कहा, अब खड़े हो गए हम! उनको नमस्ते की! और निकल आये! रास्ता उनसे पूछा ही लिया था, सो अब वहीँ जाना था! निकल पड़े! स...
वो सुमेश बंगाली बाबा, दूर ये बाबा लहना और तीसरी वो लड़की पूनम! इनके बारे में जानकारी तो थी, लेकिन वो पर्याप्त नहीं थी, कि कैसे उन तक पहुंचा जा सके! अब ...
दिल चटका अब! "कहाँ से आया है?" उसने पूछा, "गोरखपुर से" मैंने कहा, उसने ज़ोर लगाया, "गोरखपुर से तो एक आया है, लेकिन उसका नाम सुमेश नहीं है" उसने...
फिर से वो लड़की आयी और पानी ले आयी, हमने पानी पिया! "हमे देख के क्यों भाग गयी थी?" जीवेश ने पूछा, वो हंसी तो ज़रूर लेकिन कुछ कहा नहीं उसने! और तभी...
उसने बताया कि शोमा यहाँ से कोई किलोमीटर दूर रहती है, उसने एक जगह का नाम भी बताया, हाँ, वो रहती यहीं थी पहले! अब चले वहाँ के लिए, टूटा-फूटा रास्ता! ए...
सलाह तो अच्छी थी! "चलो" मैंने कहा, और हम खड़े हुए! चले उसके साथ! वे बाबा चौरंग नाथ थे जिनका ये डेरा था! जीवेश के पिता जी के अभिन्न मित्र थे और ...
"हाँ" एक साल" मैंने कहा, "उस बंगाली बाबा का नाम सुमेश है?" उसने पूछा, "हाँ" मैंने कहा, "ठीक है" वो बोला, "अब आप कीजिये आराम, सुबह मिलते हैं" व...
वहाँ मैं अपने एक जानकार के पास गया! हम तीनों वहीँ ठहरे उस रात, यहाँ मेरे जानकार भी बहुत अच्छे और समझदार थे! यहाँ रात काटनी थी और कल फिर मालदा के लिए न...
उसने सहायक को सामान-सट्टा लाने को कहा और फिर बैठ गया हमारे साथ! "मालदा में मेरे जो जानकार हैं, वे अक्सर यहीं आते हैं, वहीँ चलना मेरे साथ, बढ़िया रहेग...
"अच्छा! तो यहाँ छिपा बैठा है वो!" वो बोला. "हाँ" मैंने कहा, "तो साले को पकड़ लो?" उसने कहा, "यही सोच रहा हौं" मैंने कहा, "इसमें सोचना क्या? माल...
स्थान को नमन किया! और बाहर आया! फिर से हाथ-मुंह धोये और वहाँ से निकल पड़ा! अपने कक्ष के लिए! कक्ष में पहुंचा! शर्मा जी खड़े हुए! "कुछ पता चला?...
