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सोते, ऊंघते, बैठे आखिर शाम को हम पहुँच गए कोलकाता! वहाँ उतारते ही सबसे पहले भोजन किया और फिर वहाँ से जीवेश ने हमको उसके जानकार के यहाँ चलने को कहा, ये...
अब वो उठा और चला गया! इसके बाद मैं और शर्मा जी आराम करने के लिए लेट गये! रात हुई, रात को फिर से खाना-पीना हुआ और हमने आगे की रणनीति बनायी, क्या ...
लहना से जो जानना था सो जान लिया था, हाँ, ये नहीं पता था कि वो हमारी बात समझ चुका है या नहीं! खैर, इसका पता भी चल ही जाना था, अब अगला मुक़ाम था हमारा उस...
"सुन अगर तूने उस सोमेश को खबर की, तो साले तू कहीं भी छिप जाइयो, तेरी माँ ** ** फाड़कर भी बाहर निकाल लूँगा तुझे!" जीवेश ने कहा! बाबा डर गया! और चेले...
"इस सोमश को पता है?" मैंने पूछा, चुप! "बता?" मैंने पूछा, "हाँ, पता होगा" वो बोला, "अब तू हमारी कैसे मदद करेगा?" जीवेश ने पूछा, फिर से चुप! ...
"कितने दिन हुए?" उसने पूछा, "हरामज़ादे एक साल हो गया पूरा!" वे बोले, अब बाबा ऐसे काँप रहा था जैसे ठंड में ठिठुरता कोई कुत्ता! "नाम क्या बताया?" उ...
"साले बचा लिया, नहीं तो यहीं जान दे देता अपनी!" जीवेश ने कहा, उसने चेले डर के खड़े रहे वहाँ! लाठी डंडे सब गिरा दिया हाथों से! "बता? कहाँ है वो लड़की...
उसके आदमियों की सिट्टी-पिट्टी गुम! कौन आ गए यहाँ! क्या होगा आज यहाँ? "और वो लड़की कहाँ है?" शर्मा जी ने पूछा, "मुझे नहीं पता" उसने कहा, "साले तू ...
"साले कुत्ते को बुला यहाँ? ये न समझियो कि हम अकेले हैं यहाँ, चौरंग नाथ का सारा डेरा यहीं आ जाएगा अभी, एक ही आवाज़ में, समझा?" जीवेश ने कहा, उसने चौरं...
"काम तो बताओ?" उसने पूछा, "आप बुलाओ तो सही?" जीवेश ने कहा, "काम की बात करो, नहीं तो जाओ यहाँ से!" बाबा ने कहा, बड़ा गुस्सा आया हम तीनों को! "उस...
वो हमको घुमाता-फिराता एक जगह ले गया, यहाँ कुछ गाय बंधी थीं और वहाँ एक दाढ़ी-मूंछों वाला व्यक्ति बैठा था, दाढ़ी-मूंछ सफ़ेद थीं उसकी! आसपास कमरे बने थे! वो...
"सारी बात यहीं पूछ लेगा?" जीवेश ने गुस्से से कहा, "कहाँ से आये हो?" उसने पूछा, "कोलकाता से आये हैं, यहाँ मालदा में ठहरे हैं" मैंने कहा, उन दोनों...
यहाँ से हम पैदल पैदल चल पड़े, आसपास से गुजरते लोग हम शहरियों को देख कर रुक जाते थे, वे शायद मदद करने को तैयार थे बस हमारे पूछने की देर थी! आगे गए तो दो...
महफ़िल बढ़ चली आगे! "जीवेश, वहाँ बाबा चौरंग के मित्र हैं, उनसे भी मिल लेंगे" मैंने कहा, "हाँ, ज़रूर!" वे बोले, और हम खाते पीते रहे! बातें करते रहे!...
अब हम बाबा का धन्यवाद किया, नमस्कार की और वहाँ से निकल पड़े! अपने कक्ष में आये! बैठे, "अब बताइये क्या करना है आगे?" जीवेश ने पूछा, "कल चलते हैं...
