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"हाँ" उसने कहा, "कब, रात को?" मैंने कहा, "हाँ" उसने कहा, "कोई लेने आएगा या मैं लेके चलूँ?" मैंने पूछा, "आप चलो" उसने कहा, "ठीक है!" मैंने कह...
फिर से अपने माँ-बाप को देखा! "ये नहीं कहेंगे कुछ!" मैंने कहा, उसने मुझे देखा अब! बेबस सी! मुझे तरस आ गया उस पर उस समय! "कुमार साहब?" मैंने क...
"हाँ" उसने कहा, "मैं लेकर चलूँ?" मैंने पूछा, "चलो" वो बोली, जो देखना था, देख लिया! उसको कोई डराता या धमकाता नहीं था, जो भी कोई आता था वो उसकी रा...
"खाना खिलाते हैं?" मैंने पूछा, "हाँ" उसने कहा, "कितने लोग होते हैं वहाँ?" मैंने पूछा, "बहुत सारे" उसने कहा, "अच्छा! किसी का नाम पता है?" मैंने...
"हाँ?" उसने उत्तर दिया! "कैसी हो?" मैंने पूछा, इस सवाल पर उसने अपने दोनों हाथ उठाये और मुझे दिखाए! जवाब नहीं दिया! "कैसी हो?" मैंने कहा, कुछ न...
तभी उनका बेटा आया वहाँ, उसने खाने की पूछी, तो हमने मना कर दिया, अभी भूख नहीं थी, वो चला गया! "और वो जो आदमी आया था अभी, क्या कह रहा था?" शर्मा जी ने...
कम से कम एक घंटे बाद खाना-पीना ख़त्म हुआ! और शर्मा जी विदा लेकर चले गए! मैं अपने कमरे में जाकर लेट गया और सो गया! और फिर शनिवार भी आ गया, शर्मा ज...
उसने ले लिया! "ये भी ले ले कन्ना!" मैंने कहा और एक टुकड़ा मानसा का दे दिया उसको! उसने ले लिया! "क्या बात है? साहू नहीं है वहाँ?" मैंने पूछा, "साह...
"कह रहे थे कि एक आदमी और आया था देखने के लिए लड़की को" वे बोले, ''अच्छा, फिर क्या कह गया?" मैंने पूछा, "यही कि लड़की को कोई भारी शय सता रही है, इस ह...
"हाँ, चलते हैं सुबह" मैंने कहा, "ठीक है, मैं कल यहीं ठहर जाऊँगा" वे बोले, "ठीक है" मैंने कहा! हमारी कुछ और बातें भी हुईं, इसी दौरान मैंने उनसे...
जो कहानी मैंने सुनी थी, वो अजीबोगरीब थी! कुछ रहस्य था जो छका रहा था सबको! क्या था वो, यही जानना था, इसीलिए मैं अपने क्रिया-स्थल की ओर मुड़ गया! मैं अपन...
"चिंता न कीजिये, जो बन पड़ेगा, वो ज़रूर करूँगा" मैंने कहा, "ज़िंदगीभर आपके एहसान तले रहेंगे गुरु जी हम" वे बोले, "कोई एहसान नहीं है इसमें!" मैंने उनक...
"हाँ जी, हम रोकते हैं तो रुक जाती है, फिर नहीं जाती" वे बोले, "कमाल है!" मैंने कहा, "हाँ जी" वे बोले, "और कुछ बात जो बताना चाहेंगे?" मैंने पूछा,...
"तो गुरु जी, कृपा करो हम पर, आ जाओ घर किसी दिन" वे बोले, "शर्मा जी, इस शनिवार को कोई काम तो नहीं?" मैंने पूछा, "नहीं गुरु जी" वे बोले, "तो चलें ...
"लेकिन इस मलखान की हवेली के बारे में किसी को तो पता ही होगा?" मैंने पूछा, "हमने मालूम किया, लें आसपास के गाँव में भी कोई ऐसी और इस नाम की हवेली नहीं...
