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"जी, कहिये?" उसने गर्दन घुमाते हुए पूछा, "मुझे कुछ बात करनी है" मैंने कहा, "अभी?" उसने पूछा, "हाँ" मैंने कहा, "थोडा रुकिए!" उसने कहा! तब दो ...
उठाया और शर्मा जी ने भी! और मुंह में रखने से पहले ही ध्यान आ या कि ये एक साथ नहीं खाया जा सकता, इसलिए हमने उसको दो भागों में तोडा और मुंह में रखा! पूर...
में! कटार और खंजर सभ खोंसे हुए थे उन्होंने, हमको वहाँ देख जैसे महफ़िल का तारतम्य रुक गया! सभी हमे ही देखने लगे! लेकिन हम मलखान सिंह के मेहमान थे, खुद म...
"मैं कोई जेनुआ नहीं हूँ" मैंने कहा, "हाँ, नहीं तो आ नहीं पाते यहाँ तक!" वो बोला, मैं समझ गया! बहुत दूर की बात कही थी उसने! ये विश्वास का एक धागा थ...
तो मुझे और शर्मा जी को बिना किसी हथियार के ही खदेड़ देता! ऐसा था वो! जैसे कोई सिपहसलार! और उसके साथ एक औरत थी! पचास वर्ष के आसपास! बाल खुले थे उसके, ...
"क्यों?" मैंने पूछा, "नहीं जा सकते का मतलब नहीं जा सकते" वो बोला, "अच्छा! और वो माई जा सकती है बाहर? एक मासूम लड़की को यहाँ तक लाती है इस उजड़े बसेर...
"कौन हो तुम?" उसने पूछा, मैंने अपना परिचय दे दिया! "क्यों आये हो यहाँ?" उसने पूछा, "माई से मिलने" मैंने कहा, "यहाँ कोई माई नहीं" उसने कहा, "...
मैंने कलुष-मंत्र पढ़ा अब और अपने और शर्मा जी के नेत्र पोषित कर दिए! और अब नेत्र खोले! सामने का दृश्य स्पष्ट हुआ! हवेली के बीचोंबीच रौशनी फैली थी! ये ...
उसके बाद उन्होंने एक लाल रंग का थैला निकाल कर रख लिया उस छोटे बैग में, आज ज़रूरत थी इसकी! और फिर बजे पौने ग्यारह! खाना खा लिया था, अब महफ़िल में शिरक़त...
"टॉर्च ही चाहियें न?" उन्होंने पूछा, "हाँ बस" मैंने कहा, 'और कुछ तो नहीं?" उन्होंने पूछा, "नहीं" मैंने कहा, "आज नयी टॉर्च मंगवा ली हैं मैंने!"...
"ग्यारह बजे भी कोई न कोई तो होगा ही वहाँ? प्रेत-काल संधि के समय हम वहीँ होंगे" मैंने कहा, "ठीक है" वे बोले, उसके बाद बातें करते करते आँख लग गयी! थ...
"हाँ, लेकिन अब सिर्फ मैं और शर्मा जी ही आयेंगे" मैंने कहा, "क्यों गुरु जी?" कुमार साहब ने पूछा, "वहाँ न जाने क्या हो?" मैंने समझाया! "अच्छा" वे ...
लेकिन अब वो नहीं था वहाँ, वहाँ कोई रास्ता भी नहीं था, एक खड़ी सी ढलान थी, वहाँ उतरना खतरे से खाली नहीं था! "कहाँ गया वो?" मैंने पूछा, "पता नहीं" वे...
"अब हमे रात को आना होगा यहाँ!" मैंने कहा, ''अच्छा!" वे बोले, "क्या करें? चलें?" मैंने कहा, "चलिए" वे बोले, और हम वापिस चले वहाँ से! वहाँ कोई न...
"यहाँ लगती है महफ़िल!" मैंने कहा, "अच्छा!" शर्मा जी बोले, "कुमार साहब! यहाँ आती है मीतू!" मैंने कहा, उनको झटका सा लगा! जैसे बेचारे गिरने वाले ह...
