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ये मायावी सर्प नहीं थी, असली थे! मन्त्रों से बंधे वे आ गए थे वहाँ! सभी ज़हरीले! बड़े बड़े सर्प! उन्होंने मुझे जैसे घेर लिया था, मेरे चारों ओर थे वो! कोई ...
जब आँख खुली तो सात बजे थे! शर्मा जी भी उठ गये! “शर्मा जी चाय का प्रबंध करवाइये” मैंने कहा, “जी” वे बोले, और वे बाहर चले गए, थोड़ी देर में आ ग...
अब मैंने अपना कमरा बंद किया और शर्मा जी को बाहर बिठा दिया! मैं कुछ अमोघ मंत्र जागृत करना चाहता था, और मैं फिर लग गया इस काम में! करीब दो घंटे लग गए! ल...
वे दोनों मूर्ख हंस रहे थे आपस में बातें करके! उन्हें इस मामले की गम्भीरता का भान भी नहीं था! तभी मुझे वे मजदूर भागते दिखायी दिए, अलग अलग दिशाओं में, ज...
अब मुझे वहीँ ठहरना था ताकि अब कोई मुसीबत हो तो मैं उसका मुक़ाबला कर सकूँ! फिर से वे चारों मजदूर खुदाई में तल्लीन हो गए! करीब एक घंटा हुआ और वे मजदू...
“चलिए गुरु जी” विजय ने कहा, मीनाक्षी भी वहाँ आ गयी थी! उसने नमस्ते की, लेकिन उसको आज नहीं जाना था हमारे साथ, सो वहीँ रुकना था उसको! और फिर हम गाड़ी...
“मीनाक्षी?” मैंने कहा, “हाँ जी?” उसने कहा, “कल आप यहीं रहना, वहाँ नहीं जाना, विजय आ गए हैं तो हम ही जायेंगे वहाँ” मैंने कहा, “जी” वो बोली, विज...
तब तक मीनाक्षी भी आ गयी, एक थैला सा लेकर! सुनील उठा और उसमे से दारु की दो बोतल निकाल लीं, साथ में खाने को भी लाया था, सो वो भी निकाल लिया! अब गिलास रख...
“वे गुरु हैं तुम्हारे?” मैंने पूछा, “अ….ब……जी थे अब नहीं” उसने बनावटी हंसी हँसते हुए कहा, “अच्छा हुआ, खुद तो मरते ही तुम्हे भी मारते वो” मैंने कहा...
“ठीक है, विजय आया क्या?” मैंने पूछा, “नहीं, मैंने पूछा था, करीब एक घंटे में आएगा वो” उन्होंने बताया, और फिर थोड़ी देर में मीनाक्षी आ गयी, चाय लेकर!...
कुछ न कह सके वो! कैसे कहते! अब गाड़ी में हम चार थे! मैं, शर्मा जी, मीनाक्षी और सुनील! चल पड़े वहाँ से! रास्ते भर मैं गालियां सुनाता रहा उनको! “स...
मीनाक्षी वहीँ खड़ी थी, उसको आभास हुआ कि कहीं कुछ गड़बड़ है! “क्या हुआ?” उसने पूछा, “हरामजादों को धन चाहिए लेकिन साले कुत्ते उन गरीब मजदूरों को मरवाने...
मुझे देख वो हराम के जने खड़े हो गए! मैं वहाँ पहुँच गया! “क्या हुआ?” मैंने उनसे पूछा, अब दोनों आँखें बचाने लगे! “सुनील?” मैंने कहा, “जी?” वो ब...
“कमाल है, कितना साफ़ काम किया है, चांदी का छोर दिखायी नहीं दे रहा!” शर्मा जी ने हाथ लगाते हुए कहा! “हाँ” मैंने कहा, मैंने वहाँ देखा, मजदूर हट गए ...
मैं वहाँ गया! पहुंचा! देखा नीचे एक छड़ी सी थी! मैं गड्ढे में उतरा, छड़ी उठाई, उसको देखा! छड़ी बांस की थी, उसके ऊपर चांदी का मुलम्मा चढ़ा था! क...
