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"जो चाहो, धन, ज़मीन, जो चाहो, बहुत बना हुआ आदमी है कुम्भा!" वो बोला, बना हुआ! अर्थात धनी! "ठीक है, मैं ले चलूँगा" मैंने कहा, "ले चलो, अभी! अभी ले...
"हाँ जी, छपते छिपाते, जंगलों के रास्ते आते हुए सोलह रोज हो गए" वो बोला, "महीना कौन सा चल रहा है छ्त्रसिंह?" मैंने पूछा, "बैसाख है जी" वो बोला, "...
कब से भाग रहा है! तभी से भागमभाग! सोच के ही दिल सिहर जाता है! इसकी ये भाग अब समाप्त करनी थी! लेकिन उसको बदला लेना था, बस अपनी बहन और भांजे को छोड़ आये ...
"बागी है जी" उसने कहा, "बागी?" मैंने पूछा, "हाँ जी, रिश्तेदार ही है, लेकिन मन फेर लिया उसने, मार डाले सभी घरवाले, मेरे बीवी बच्चे और माँ और बाबा, ...
"छ्त्रसिंह, इस टोकरी में कौन है?" मैंने पूछा, अब वो और डरा! "मैं कोई नुक्सान नहीं पहुंचाऊंगा तुमको और इनको भी, मैं वचन देता हूँ" मैंने कहा, अब ब...
पाश-मंत्र पढ़कर जड़ कर दिया उन प्रेतात्माओं को! मैंने बौराड़ की प्रशंसा की, किसी भी प्रेत, महाप्रेत को उसकी प्रशंसा बहुत भाति है, मात्र इसी से ही वो मित्...
को पकड़ने के लिए एक और ताक़तवर ताक़त चाहिए थे और ये था बौराड़! खोजी और जुझारू! ये एक महाप्रेत होता है, उच्च कोटि का! ये सामान्यतया मनुष्यों से बैर नहीं रख...
अब वे गये वहाँ अंदर बात करने! हम वहीँ गाड़ी में बैठे रहे, करीब दस मिनट में वे आये और मुझे बुलाया, मैं उतरा और शर्मा जी भी और हम चल पड़े अंदर! वहाँ वे मह...
"मैं बात करता हूँ अभी रमन जी से" वे बोले, "हाँ ठीक है" मैंने कहा, और हम चल पड़े वापिस! कमरे में पहुंचे! वे बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे, शर्मा ज...
"डरो नहीं, मैं ले जाऊँगा आपको वहाँ, ये भी सुरक्षित रहेंगे!" मैंने कहा, "नहीं! नहीं!" वो डर गया! उसने टोकरी उठा ली, उसने संतुलन बनाया! "सुनो? सुन...
इतनी लम्बी यात्रा! वो भी इनको लेकर! नहीं वो ठहरता ठहरता आया था, लेकिन किसलिए? यही जानना था! और ये ज़रूर भी था! ये बेचारा उन दोनों के साथ जो इसको टोकरी ...
बेचारा! "बता दूंगा! बता दूंगा!" मैंने कहा, वो चुपचाप खड़ा रहा! "नाम क्या है तुम्हारा?" मैंने पूछा, उसने आसपास देखा, जैसे कोई सुन न ले! "छत्रस...
अब मैं वहाँ बैठ गया! ताकि उसको मेरे ऊपर विश्वास हो जाए! "बताओ, कौन हो तुम?" मैंने पूछा, उसने मुझे गौर से देखा, फिर शर्मा जी को भी देखा और फिर वो भ...
"मैं जहां कहूं रुकने को आप रुक जाना, आगे नहीं बढ़ना!" मैंने कहा, "जी गुरु जी" वे बोले, और हम धीरे धीरे आगे बढ़े! अब मैंने शर्मा जी को हाथ के इशारे...
घर में कोई आया था शायद कोई पडोसी होगा, उसी से कुछ इधर-उधर की बातें कर रहे थे रमन जी, और फिर विनोद जी भी आ गए, नमस्कार हुई और वे हमारे साथ आ बैठे! "आ...
