श्रीशः उपदंडक
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@1008
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

मैंने सारा सामान एक टेबल पर रखा और बाहर आ गया, सहायक के पास पहुंचा और उसको वहाँ खाना भेजने को कहा, अपने लिए भी कह दिया और फिर सीधा अपने कमरे में आ गया...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

बस अपने आंसुओं को उसने अपनी ऊँगली पर लिया और अंगूठे की मदद से नीचे फर्श पर फेंक दिया! “देखो कल्पि, मेरी बात ध्यान से सुनो” मैंने कहा, “मुझे कुछ नह...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

“आप वहीँ होओगे न मेरे साथ?” उसने पूछा, “नहीं, मैं वापिस दिल्ली जाऊँगा वहाँ से” मैंने कहा, वृक्ष से कोई बड़ी सी शाख टूटी! कटाक! “दिल्ली क्यों जा...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

अब उसने फिर से मदिरा परोसी, मुझे देखा और मुस्कुरायी, उसने गिलास मुझे दिया, मैंने गिलास मुंह पर लगा खाली कर दिया, ऐसा ही उसने किया! अब उसको खुमारी सी ह...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

बहुत बड़ा और भारी प्रश्न था! यही तो है स्त्री-सुलभता! कम शब्दों में गहन अर्थ! बहुत बड़ा प्रश्न था! “उसके बाद तुम स्वयं जान लोगी कि क्या करना है” मैंने...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

“सुनो कल्पि, एक साधिका को जब साधक क्रियान्वेषण में लगाता है तो वे समरूप हो जाते हैं, उसमे धन और ऋण का समावेश हो जाता है, ये समान रूप से रहना चाहिए, को...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

“सुनो कल्पि, एक साधिका को जब साधक क्रियान्वेषण में लगाता है तो वे समरूप हो जाते हैं, उसमे धन और ऋण का समावेश हो जाता है, ये समान रूप से रहना चाहिए, को...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

ने मुझे बेहद सशक्त बना दिया था! इस कल्पि की खातिर मैं उस खेवड़ के चेले बैजू से भिड़ने को तैयार था, बस इसलिए कि शक्ति के स्वरुप का शोषण नहीं होना चाहिए क...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

“बाबा को बता दिया गुरु जी?” उन्होंने पूछा, “हाँ” मैंने कहा, “स्थान मिल गया?” उन्होंने पूछा, “हाँ” मैंने कहा, “यहीं है या कहीं और?” उन्होंने पू...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

“ठीक है बाबा” मैंने कहा, आज्ञा मिल गयी थी! मैंने नमस्ते की और बाहर आ गया! सीधा अपने कक्ष की ओर चला तो मुझे कल्पि खड़ी दिखायी दी दरवाज़े पर! मैं उस...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

“उसका फ़ोन आया था” वे बोले, ‘अच्छा, क्या कह रहा था?” मैंने पूछा, “यही कि मैं समझा दूँ तुमको, हटा दूँ रास्ते से” वे बोले, मुझे हंसी सी आ गयी! “आ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

पीछे देखा! वो मुझे ही देख रही थी! मैं मुड़ा और बाबा के कक्ष की ओर चला गया! अब मैं बाबा के पास गया! बाबा आराम से बैठे थे, फलाहार कर रहे थे, मु...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

“नहीं” उसने कहा, “जो तुम सोच रही हो वो सम्भव नहीं” मैंने कहा, “क्यों?” उसने पूछा, “मैं नहीं चाहता प्राणहारी कष्ट हो तुमको” मैंने बताया, “आपको ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

“इसका मतलब मुझे एक साध्वी के आवश्यकता होगी” मैंने कहा, “साध्वी? कौन?” उसने पूछा, “द्वन्द समय मुझे एक साध्वी की आवश्यकता पड़ेगी” मैंने कहा, “फिर?”...

2 years ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

शर्मा जी अपने कक्ष में गए और मैं गया कल्पि के पास! वो बेचारी उलझन में फंसी थी, चेहरे से साफ़ झलकता था! “कैसे परेशान हो कल्पि?” मैंने पूछा, “कुछ नही...

2 years ago
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