श्रीशः उपदंडक
श्रीशः उपदंडक
@1008
Admin
Member
Joined: Apr 29, 2024
Last seen: Sep 23, 2026
Topics: 246 / Replies: 9258
Reply
RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

“द्रूप बालिका!” अच्छा! समझ गया! वो अब द्रूप बालिका का आह्वान करना चाहता था! जान गया मैं! द्रूप बालिका एक भयानक शक्ति है! नदी का तल इसका वास है...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

बैजू सोच रहा था कि मैं उसका अहित करना चाहता हूँ! नहीं! ऐसा नहीं था, मैं उन दोनों औघड़ों को सबक सिखाना चाहता था! और तब यहाँ जैसे जैसे वो आकृतियां खंडि...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

सेविकाओं सहित लोप हो गयी! मैंने उस वृत्त के नीचे लेट गया! आँखों में आंसू आ गए! मुझे मृत्यु का ग्रास बनने से पहले ही मेरी संजीवनी बन गयी थी द्रोमा-चंडा...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

मेरी साध्वी फिर से खड़ी होने वाली थी, अब मैंने अपना त्रिशूल उठाया और त्रिशूल को छुआ और अपने अस्थिमाल से लगाया, और फिर उसको तरफ कर दिया, वो उछल पड़ी, नीच...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

तभी मेरे यहाँ रक्त की बूँदें बरसने लगीं! घनघोर! मैंने मंत्र पढ़ते हुए ही त्रिशूल को अलख में छुआ कर भूमि पर त्रिकाल चिन्ह खींच दिया! बरसात बंद हुई, मेरे...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

तभी बैजू खड़ा हुआ! और घोर-नृत्य करने लगा! ये कर्णाक्षी का आह्वान था! मुझे भी किसी महारौद्र शक्ति की आवश्यकता थी! तभी मेरे मन में मेरे गुरु के कहे शब्द ...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

“साधिका?” मैंने फिर से पुकारा! कोई असर नहीं! अब मुझे क्रोध आया, लेकिन क्रोध को पीना पड़ा मुझे! क्रोध का कोई औचित्य नहीं था वहाँ! मैंने फिर से त्र...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

वो खड़ा हुआ और मैं भी! उसने भी नमन किया और मैंने भी! अपनी अपनी आराध्या को! बैजू ने उद्देश्य बताया! और चल पड़ी मदमाती जम्बूख वहाँ से, जैसे कोई उड़ता...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

वहाँ बैजनाथ अपनी एक साधिका के वक्ष-स्थल पर बैठा मंत्रोच्चार कर रहा था, वे औघड़ वैसे ही लेटे थे! तभी मेरे कानों में ध्वनि पड़ी! जम्बूख! ओह! तो वो ज...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

अब उसने अपने सहायक औघड़ों को कुछ आदेश दिया! औघड़ वहीँ लेट गए, आधे गड्ढे में और आधे बाहर! अब मैंने अपने यहाँ अपनी मुद्रा सम्भाली! मैंने अपनी साध्वी को ...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

मैंने नमन किया और फिर वो लोप हुई पुंज रूप में और मेरे चारों ओर मुस्तैद हो गयी! अब मैंने मदिरा का एक और कटोरा भरा और कंठ के नीचे उतार दिया! श्री महा-औघ...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

न मेरे लिए, न अपने लिए ही! अब वो अर्पण था! शक्ति के लिए अर्पित शरीर! वो लेती हुई थी, आँखें बंद किये, केवल अपने साधक की ही बातें सुन सकती थी, जैस...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

गाड़ दिया! अब मैंने अपने तमाम वस्त्र और केश खोले, फिर भस्म-स्नान किया, स्नान करते करते मैं महामंत्र पढ़ते जा रहा था! फिर मैंने बड़े बैग से निकाल कर पांच ...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

सर टिका दिया उनके चरणों में! उन्होंने मुझे एक मंत्र पढ़ते हुए आशीर्वाद दिया! मैं हंसी-ख़ुशी वहाँ से चला आया! अब जैसे नव-ऊर्जा का समावेश हो गया था ...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

“वैसा ही करोगी न?” मैंने मुस्कुरा के पूछा, “हाँ!” उसने भी हंस के उत्तर दिया! “ठीक है कल्पि, छह बजे स्नान कर लेना, मैं यहाँ पौने सात बजे आउंगा, तुम...

2 years ago
Page 11 / 634
error: Content is protected !!
Scroll to Top