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एक सफ़ेद, और एक संतरी! कैसा दिव्य प्रकाश था! मन हुआ, भाग जाऊं अभी वहाँ! पर बाबा नहीं माने! अब नींद उड़ गयी थी! सुबह होने को ही थी! ...
धवल प्रकाश था! हम किसी, अलौकिक दृश्य के साक्षी बन चुके थे! वो प्रकाश ठहर गया! और हमारी नज़रें भी ठहर गयीं! और फिर अचानक से वो प्रकाश गाय...
वे जागे, और दिखाया उनको! विस्मय में रह गए वो! वो प्रकाश पुंज, धीरे धीरे ओझल हो गए नज़रों से! ये वही था! वही मणिधारी नाग! "चलें बाब...
तरोताज़ा हो गये! फिर से दो दो रोटियां खा लीं, अचार के साथ, अब तो रोटियां पापड़ बन गयी थीं! सुबह की सुबह ही देखते! रात हुई! आग जलायी! ...
न उनको मिली, न हमको ही! अब फंस गए थे हम! क्या करें? मंत्र चलाते, तो किसी अनहोनी की आशंका थी! अब तो केवल एक ही काम था, वापिस पेड़ क...
एक बाएं से जाएगा, और एक दायें से, और फिर आपस में मिल जायेंगे, यदि कोई कंदरा होगी, तो पता चल जाएगा! और फिर देखते हैं क्या होता है! और...
और पहुँच गए एक जगह! "ये, ये है वो पेड़, जहां मैं छिपा था" बाबा ने कहा, मैंने पेड़ देखा, बड़ा मोटा पेड़ था, उसकी शाखाएं भूमि के करीब ही छू रही ...
कि आगे किया क्या जाए! अब मंत्रणा हुई! और फिर निर्णय हो गया! हम आकर बैठे! "तो चले बाबा पहाड़ी पर?" मैंने कहा, "हाँ, चलते हैं" वे बोले, ...
अब बाबा टेकचंद उठे! औए घेरा खींचा एक, सुरक्षा घेरा, विष-हरण घेरा! ताकि कोई, विषैला कीड़ा-मकौड़ा, सांप, बिच्छू प्रवेश न करने पाये! औ...
चाँद आ डटे! बाबा ने अपनी टॉर्च ठीक कर ली थी! नए सैल डलवा लिए थे! अब आँख-मिचौली नहीं करती वो! घुप्प-घनेरी रात थी वो! बस, आग की लपटों की ...
और फिर खड़े हुए! जूते पहने! शरीर ने न कही! अनसुना किया! और चल दिए आगे! चलते रहे! चलते रहे! रात करीब आठ बजे, हम पहुँच गए वहाँ! ...
मजबूरी थी! मैंने अपने बाएं देखा, सामने झड़बेरी लगी थी! मोटे मोटे बेर लगे थे, गोल गोल! मैंने जूते पहने, और शर्मा जी को लिया साथ, और...
चलते रहे! अब छाया आ गयी थी पेड़ों की, अब गर्मी उतनी नहीं थी, हाँ, नमी बहुत थी! घास और झाड़-झंकाड़ की! दीमकों की बाम्बियां बनी थीं! रेंग...
और फिर आगे बढ़े! बढ़ते रहे! और सड़क आ गयी! "कोई साधन नहीं है आसपास तक?" मैंने पूछा, वे हँसे! "नहीं! जंगल में कहाँ से होगा!" वे बोले, सह...
और रुमाल हाथ में ले, उठ खड़े हुए! बाबा हरी सिंह का तो साफ़ा ही बहुत था! धूप से बचने के लिए! और अंगोछा हाथ में लिया हुआ था, तभी कंधे पर रख...
