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"जैसी आपकी मर्जी बाबा! मै तो सिर्फ गुहार लगा सकता हूँ, मानना ना मानना आपके ऊपर है" मैंने कहा, अब मै वहाँ से उठा तो बाबा ने ऊँगली के इशारे से फिर नीच...
वे बोले, "ओह! ये तो बड़ी भारी भूल हो गयी इस से!" मैंने कहा, "हाँ! इसने एक बार भी गलती नहीं मानी अपनी! जूता वहीँ मेरी जगह पर ही झाड़ा इसने!" वे बोले,...
"इसको तो कतई माफ़ न करूँ, मेरे सर पर पाँव रख दिया इसने, माफ़ नहीं करूँ कतई!" मोंटू बोला, "इसको मालूम न होगा, आखिर है तो आदमजात ही, माफ़ कर दीजिये बड़े म...
हाथ न लगाने दे! तस्वीरें वहाँ से हटाने को कहे! अरबी और उर्दू के अलफ़ाज़ बोले! खालिस! और फिर आँखें मूँद के चुप हो जाए! घरवालों को बड़ा अजीब लगा! अचानक म...
गाड़ी का इंतज़ार किया, और जब गाड़ी आयी, तो सवार हुए, और फिर पहुँच गए हम, रात्रि से थोडा पहले वहाँ! बाबा शम्भू नाथ को सब बता दिया! उन्हो...
अब हम उठे! उन दोनों बाबाओं ने जयकार किया! और हम वापिस आ लेटे वहाँ! मै उसी के बारे में सोचता रहा! प्रश्न बुनता, और फिर सुलझा भी देता! ...
हम, देखते रहे उनको! जाते हुए! हम तो, कृतज्ञ हो गए थे उनके! वो प्रकाश, चलता रहा आगे आगे, और फिर धूमिल होता गया! और जैसे फिर शून...
हम धन्य हो गए थे! हम चारों हाथ जोड़े, और नेत्र बंद किये, उस अपरम्पार की इस अपार अनुकम्पा पर, अपने आपको को गौरान्वित महसूस कर रहे थे! और ...
बस, यही जानिये आप! तो पुण्यों का क्षय क्यों हो? उन्हें संचित करें तो, क्या नहीं हो सकता? आपको देवत्व भी प्राप्त हो सकता है! क्या असम्भव...
यही है सच! मूल रूप से सच यही है! अब ये जो शब्द है न कर्म? इसके कई भेद हैं! कई भेद! इतना सरल नहीं इसको जानना! बस आप इतना जानो, कि ...
और क्या चाहिए था! ये किसी आशीर्वाद से कम नहीं था! बिलकुल कम नहीं! ये तो महा-आशीर्वाद था! महा-आशीर्वाद! सच कहता हूँ मित्रगण! स्वर्ग! ...
उल्लेख पढ़ा था मैंने इसका, कहीं, कहीं तो अवश्य ही पढ़ा था! हाँ! याद आया! ये उषालि-प्रदेश कद्र्प से सम्बंधित है! हाँ! जान गया! और तभ...
वो सुगंध मुझे आजतक याद है! देवत्व भरा था उस सुगंध में! हाँ, वो स्वर! "मै कंद्रपमणि हूँ!" वो बोला, एक विलक्षण सा मद था उस स्वर में! ज...
अपनी गति भूल गया था! वो भी स्थिर रह गया था, ऐसा रूप देखकर! तभी मेरे पीछे, जयकार सा हुआ! मैंने पीछे देखा, बाबा टेकचंद और बाबा हरी सिं...
