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फौजी साहब के मन की बंदूक की नाल से,पहले ही धुंआ उठने लगा था!चोक हो चली थी वो जैसे,इंसान हो तो चलो दो-चार हाथ आजमा भी लो,और जो प्रेत हुआ,तो साहब क्या द...
और फिर खाना खाया चारों ने!रास्ता कुछ निकल नहीं रहा था,चिंता ऐसी लगी थी कि जैसे ही,उन लठैतों की फेंट याद आती,रोंगटे खड़े हो जाते चारों के!दो महीने बीत ग...
"यहां तो कोई है भी न?" बोले बिशन जी,"ढूंढ़न दो मोय!" बोले वो,तो जी, एक खेत में, पीछे की तरफ, एक आदमी दिखा, कस्सी चलाता हुआ, बिशन जी चले वहाँ, उस आदमी स...
सांटा था तो बुग्घी में ही, लेकिन उन टाट के बोरों में ही सरक गया था कहीं, ढुंढेर मची थी, आखिर में, रामधनी ने निकाला एक बोर के नीचे से! और दिया बिशन को!...
गाँव की चौपाल पर,सैल मंगवा, एक मटरू के घर से,एक छिद्दा के घर से,आदि आदि, रेडियो बजाया जाता था!ठाठ थी जी हुक्के की!गुड़गुड़ाते रहते हुक्का सब!तो वे चले,द...
उन घड़ो में ही खोये रहे!न दीखते और न ही ये बला आती!नींद ही भाग गयी थी!हाड़ टूटे दीखते थे उनको तो!टूटे हाथ,टूटे पाँव!सर ही फाड़ दें तो भी क्या कहने!कोस रह...
"कहाँ बेका?" पूछा उसने,अब सब बता दिया!अब कहाँ मिलता वो!अब तो गलगला कर, सब बंदोबस्त ही गया होगा उसका!"देखो, तुम आदमी शरीफ हो, इंतज़ाम कर लो, तीन महीने ब...
कुल रकम निकली ढाई लाख,यही दे देते हैं, कुछ तो बोझ हल्का होगा,फिर पाँव पड़ लेंगे, हो सकता है मान ही जाएँ,लगते तो भले हैं,अब गलती हो गयी सो हो गयी,भाई, स...
तो हुई शाम,और वो दोनों लठैत आये खेत में, पीछे से!राम राम हुई उनसे!खटिया बिछवाई गयी उनके लिए,पानी पिलवाया गया, दूध-खांड की पूछी गयी!उन्होंने न पानी ही ...
अंग्रेजी राज में!लेकिन बंजारे यहां क्यों आएंगे?किसलिए?इतने सालों बाद?उन्हें कैसे पता?ये मामला है क्या?दिमाग उलझ गया!सीटी बजने लगी!उनकी फेंट नज़र आने लग...
खड़े खड़े कांपें अब!"देख भाई! हमारा सामान दे दे!" बोला वो,"समान नहीं है अब" बोले किशन जी,"कहाँ गया?" बोला वो,"खर्च कर दिया" बोले वो,"तो इकठ्ठा करो! एक म...
कोई शाम के छह बजे, वही दो पहलवान आये वहां, पीछे से!सीधा बिशन के पास! किसी का कोई डर नहीं!"ला भी ला!" बोला वो,"तू है कौन रे?" बोला एक पट्ठा किशन जी का!...
आ गया सबकुछ याद उन्हें!"आया याद?" बोला एक,"हाँ! आ गया!" बोले वो,"हफ्ते बाद आएंगे, सामान वापिस दे देना, नहीं तो यहीं गाड़ दूंगा ज़िंदा!" बोला धमका कर उन्...
बाँट लिए गए! और कुछ ज़मीन और खरीद ली गयी! परिवार में अब मौज ही मौज!एक साल बाद!उस दिन दशहरा था! काम खत्म हो चुका था! बिशन लाल खटिया पर बैठ, हुक्का गुड़गु...
