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लेकिन अब डर ये था कि, वो सरदार धीमणा आएगा तो क्या होगा!"वो आया तो?" बोले किशन जी,"आने दो!" कहा मैंने,और हम तो लेट गए वहां!करीब घंटा बीत गया, कोई नहीं ...
"है कैसे नहीं?" बोला वो,"कैसे है?" पूछा मैंने,"हमने रखा था" बोला वो,"तो?" कहा मैंने,"अब याद आई है?" कहा मैंने,"माल दिला दो" बोला वो,"कोई माल नहीं है" ...
कुरता, छोटे वाला, कमर तक का पहना था,और धोती पहनी थी सफेद रंग की,पांवों में जूतियां, तावदार!उनके मोटे लट्ठों पर, पीतल खंचा था, हर गाँठ पर!मूंछें रौबदार...
और फिर किया आराम हमने!ठीक साढ़े चार बजे, चल पड़े खेतों के लिए!पहुंचे वहाँ, पानी पिया, और बैठे चारपाई पर,मैंने वहाँ कलुष साध लिया था, नेत्र भी पोषित कर ल...
पत्थरों की पटिया से बनाया गया था,"इसी में थे वो घड़े?" पूछा मैंने,"हाँ जी" बोले वो,"घड़े हैं क्या?" पूछा मैंने,नहीं जी, नहर में सैला दिए" बोले वो,"कोई ब...
दिए! मुझे हैरानी हुई! मैंने नहीं लिए पैसे! नहीं मान रहे थे, लेकिन नहीं लिए, वो वैसे ही मुसीबत में थे! ये पैसे उनके ही काम आते तो अच्छा था! उन्होंने बा...
अब वकील साहब के होश उड़े!इंसान हो तो फौजदारी का मुक़द्दमा दायर करें!इन प्रेतों से कौन छुड़ाए?उन्होंने भी मारे हाथ-पैर!और उन्होंने,अपने साले साहब से की बा...
"चल भाई फौजी! भोंक दियो ऊंटनी की ** में भाला तूने तौ! फ़ौज में कहीं चपरासी तो न रहौ तू?" बोले किशन जी!बेचारे फौजी साहब!न बोलते बने!न चुप रहते!खांसी उठन...
"जी" कहा नंदू ने,"जब तुम्हारे पास माल हो जाए, तो उस चबूतरे पर रोटी रख देना चार, अगले दिन आ जाएंगे हम! एवेर न करना, नहीं तो अगले महीने फिर आएंगे हम!" ब...
"क्या बात है?" बोला एक,"जी, सामान न मिला" बोले किशन जी,"देखो भाई, ऐसा कब तक चलेगा, वो हमारा सामान था, तुमने ले लिया, अब वापिस कर दो" बोला वो,"कहाँ से ...
तो ऐसे ही करते करते, वो दिन भी आ ही लिया!उस दिन, वे चारों, दो मजदूर, वो नंदू भगत और फौजी साहब,जेब में चालीसा रखे, जा पहुंचे खेत में!आज आना था उनको शाम...
मरने के बाद भी न छोड़ें!कैसा जुलम भयो!कैसी बुद्धि फिरी!चबूतरा तोड़, माल ही निकला लाये!वहीँ जो पड़े रहन देते?कहीं भाग रौ था?बाद में निकाल लेते?पर न जी न!ह...
फौजी साहब के मन की बंदूक की नाल से,पहले ही धुंआ उठने लगा था!चोक हो चली थी वो जैसे,इंसान हो तो चलो दो-चार हाथ आजमा भी लो,और जो प्रेत हुआ,तो साहब क्या द...
और फिर खाना खाया चारों ने!रास्ता कुछ निकल नहीं रहा था,चिंता ऐसी लगी थी कि जैसे ही,उन लठैतों की फेंट याद आती,रोंगटे खड़े हो जाते चारों के!दो महीने बीत ग...
"यहां तो कोई है भी न?" बोले बिशन जी,"ढूंढ़न दो मोय!" बोले वो,तो जी, एक खेत में, पीछे की तरफ, एक आदमी दिखा, कस्सी चलाता हुआ, बिशन जी चले वहाँ, उस आदमी स...
