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वो खड़ा हुआ और मैं भी! उसने भी नमन किया और मैंने भी! अपनी अपनी आराध्या को! बैजू ने उद्देश्य बताया! और चल पड़ी मदमाती जम्बूख वहाँ से, जैसे कोई उड़ता...
वहाँ बैजनाथ अपनी एक साधिका के वक्ष-स्थल पर बैठा मंत्रोच्चार कर रहा था, वे औघड़ वैसे ही लेटे थे! तभी मेरे कानों में ध्वनि पड़ी! जम्बूख! ओह! तो वो ज...
अब उसने अपने सहायक औघड़ों को कुछ आदेश दिया! औघड़ वहीँ लेट गए, आधे गड्ढे में और आधे बाहर! अब मैंने अपने यहाँ अपनी मुद्रा सम्भाली! मैंने अपनी साध्वी को ...
मैंने नमन किया और फिर वो लोप हुई पुंज रूप में और मेरे चारों ओर मुस्तैद हो गयी! अब मैंने मदिरा का एक और कटोरा भरा और कंठ के नीचे उतार दिया! श्री महा-औघ...
न मेरे लिए, न अपने लिए ही! अब वो अर्पण था! शक्ति के लिए अर्पित शरीर! वो लेती हुई थी, आँखें बंद किये, केवल अपने साधक की ही बातें सुन सकती थी, जैस...
गाड़ दिया! अब मैंने अपने तमाम वस्त्र और केश खोले, फिर भस्म-स्नान किया, स्नान करते करते मैं महामंत्र पढ़ते जा रहा था! फिर मैंने बड़े बैग से निकाल कर पांच ...
सर टिका दिया उनके चरणों में! उन्होंने मुझे एक मंत्र पढ़ते हुए आशीर्वाद दिया! मैं हंसी-ख़ुशी वहाँ से चला आया! अब जैसे नव-ऊर्जा का समावेश हो गया था ...
“वैसा ही करोगी न?” मैंने मुस्कुरा के पूछा, “हाँ!” उसने भी हंस के उत्तर दिया! “ठीक है कल्पि, छह बजे स्नान कर लेना, मैं यहाँ पौने सात बजे आउंगा, तुम...
“कुछ नहीं शर्मा जी, आप यहीं रहना!” मैंने कहा, “जैसी आज्ञा” वे बोले, “मैं शाम सात बजे यहाँ से निकल जाऊँगा, तेली-डाला की तरफ, उसके बाद अंत में मैं व...
जिस समय मैं क्रिया-स्थल से बाहर आया उस समय तीन बज चुके थे, अब ढाई घटी का मौन-व्रत था, सो मैं वहीँ एकांतवास करने हेतु एक कुटिया में चला गया और चादर बिछ...
“ठीक है, अब मैं चलता हूँ, अब मुझे रात्रि समय के लिए शक्ति-संचरण करना है, अब मैं तुमसे मध्यान्ह पश्चात ही मिल सकूंगा” मैंने कहा, मैं उठा और निकल गया ...
वापिस आयी, बैठ गयी! खुश! मैंने उसको गौर से देखा! कितनी अनभिज्ञ थी वो उस स्थिति से! वो स्थिति जो आने वाली थी आज रात्रि! उसकी ये अनभिज्ञता मुझ पर और...
“हाँ, नींद ऐसी आयी कि सुबह ही खुली!” उसने हंसके बताया! उसको हँसते देखा तो मन में आया कि ऐसे ही हंसती रहे ये कल्पि! हंसती थी तो बहुत सुंदर लगती थी! स...
मैंने सारा सामान एक टेबल पर रखा और बाहर आ गया, सहायक के पास पहुंचा और उसको वहाँ खाना भेजने को कहा, अपने लिए भी कह दिया और फिर सीधा अपने कमरे में आ गया...
बस अपने आंसुओं को उसने अपनी ऊँगली पर लिया और अंगूठे की मदद से नीचे फर्श पर फेंक दिया! “देखो कल्पि, मेरी बात ध्यान से सुनो” मैंने कहा, “मुझे कुछ नह...
